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दुल्हन ने की खुदकुशी: आनी थी संध्या की बरात, लाल जोड़े के बजाए कफन में लिपटा बेटी का शव; प्रेमी संग दी जान

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 दुल्हन ने की खुदकुशी: आनी थी संध्या की बरात, लाल जोड़े के बजाए कफन में लिपटा बेटी का शव; प्रेमी संग दी जान


शाहजहांपुर के परौर के कुबेरपुर गांव में सोविंदर और संध्या के बीच प्रेम-प्रसंग की बात सामने आई है। दोनों करीब दो साल से एक-दूसरे के संपर्क में थे। एक ही बिरादरी के होने के चलते शादी भी करना चाहते थे, लेकिन घर वालों से दिल की बात नहीं कह सके। इसी की घुटन में जान दे दी। परिवार वाले भी उनके इरादे भांप नहीं पाए।


शिवनारायण के पास सीमित खेती होने के कारण उन्होंने दूध की डेयरी भी खोल रखी थी। उनका बेटा सोविंदर डेयरी में हाथ बंटाता था। उनके मकान से चार घर छोड़कर ही जितेंद्र कुमार का मकान है। बताते हैं कि दो साल पहले सोविंदर और संध्या के बीच दोस्ती हो गई थी। उनके बीच दोस्ती के चर्चे गांव में होने लगे थे। इसे लेकर संध्या के रिश्ते के चाचा ने अपने भाई और भाभी को जानकारी दी थी।


बताते हैं कि एक ही गांव का मामला होने के चलते शादी तक बात नहीं पहुंच सकी। इस बीच जितेंद्र ने अपनी बेटी का विवाह बदायूं जिले में तय कर दिया। लड़का अभी बीएससी की पढ़ाई ही कर रहा है। पिछले महीने बात तय करते हुए 51 हजार रुपये भी लड़के के हाथ पर रखकर बात पक्की कर दी थी। 



बताते हैं कि संध्या शादी को लेकर खुश नहीं थी। बृहस्पतिवार को संध्या की बरात आना थी, लेकिन उससे पहले ही संध्या और सोविंदर ने मौत को गले लगा लिया।


फरवरी में दिल्ली से लौटा था सोविंदर -शिवनारायण के चार बेटों में सोविंदर सबसे छोटा था। सुधीश और सचिन की शादी हो चुकी है। सोविंदर के लिए उन्होंने मकान बनवाया था। सोविंदर दिल्ली में काम करने के लिए गया था। फरवरी में वह लौटा था। 


पोस्टमॉर्टम हाउस पर मृतक के पिता शिवनारायण ने बताया कि बड़ा बेटा सुधीश के घर में नहीं होने के चलते सोविंदर को दावत में भेजा था। इसके बाद शिवनारायण खेत पर चले गए। बेटे को याद कर शिवनारायण बिलख पड़े। बोले कि बेटे ने उन्हें किसी लड़की के बारे में नहीं बताया था। बेटी की मौत से मां धनदेवी भी बिलख पड़ीं। 


सजना था मंडप, होनी थी तेल की रस्में, कफन में लिपटकर पहुंचा बेटी का शव

जितेंद्र यादव की बेटी संध्या उर्फ नन्हीं की बरात के लिए मंगलवार की शाम को सारी तैयारियां पूरी की गई थी। बुधवार को मंडप सजना था और उसी में तेल की रस्में होनी थीं। बरात के लिए सारी तैयारियां पूरी थी। करीबी रिश्तेदार भी आ गए। जिस घर में मंगल गीत गाए जा रहे थे, वहां संध्या की मौत के बाद मातम छाया है। शाम को पोस्टमाॅर्टम के बाद शव गांव पहुंचा तो मांग रामगुनी बिलख पड़ी। 


भाई उग्रसेन, बहन सरिता, कीर्ति, कीरना आदि भी दहाड़े मारकर रो पड़ीं। रिश्तेदारों के अनुसार, बृहस्पतिवार को बरात को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। संध्या से छोटी बहन की शादी कर विदाई बाद में की जा सकती है। 


बुधवार को था मंडप का कार्यक्रम 

मंगलवार को परिजन दहेज के लिए करीब एक लाख रुपये का सामान भी लेकर आए थे। बुधवार को मंडप होना था। सुबह खेतों पर जाने के लिए निकले लोगों ने शव लटके देखे। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव फंदे से उतरवाए। ग्रामीणों के मुताबिक यह बात संध्या के परिजनों को भी पता थी। गांव का ही लड़का होने के कारण वे सोविंदर से शादी करना नहीं चाहते थे।

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