हरदोई में 'यमराज' बनी खाकी मासूम के गुनहगार का 24 घंटे में 'द एंड', एनकाउंटर से कांपा अपराध का साम्राज्य!
मनोज तिवारी
हरदोई: कहते हैं कि कुदरत की लाठी बेआवाज़ होती है, लेकिन जब वो पड़ती है तो अपराधी को संभलने का मौका भी नहीं देती। हरदोई के मल्लावां में एक मासूम की 'हाय' ऐसी लगी कि 24 घंटे के भीतर ही दरिंदे का 'पाप का घड़ा' फूट गया। जिस मेहनूर उर्फ नूर ने 7 साल के बच्चे के साथ हैवानियत की हदें पार की थीं उसे मौत की नींद सुला दिया था, पुलिस ने उसे मुठभेड़ में जहन्नुम का टिकट थमा दिया है।कातिल मेहनूर खुद को 'क्राइम मास्टर' समझ रहा था। मासूम के साथ कुकर्म और फिर उसकी हत्या करने के बाद, उसने पुलिस को चकमा देने के लिए फिल्मी स्टाइल में अपहरण और फिरौती का ड्रामा रचा। चोरी के सिम से फोन घुमाया ताकि खाकी भटकती रहे, लेकिन उसे क्या पता था कि पुलिस की 'थर्ड आई' और सुरागों के जाल ने उसकी कब्र पहले ही खोद दी थी।बुधवार की सुबह जब सूरज की पहली किरण भी ठीक से नहीं निकली थी, तब मल्लावां पुलिस और SOG ने कातिल को चारों तरफ से घेर लिया। खुद को फंसा देख 'इनामी बदमाश' ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। इस आमने-सामने की जंग में SOG प्रभारी राजेश कुमार ने जांबाजी दिखाते हुए मोर्चा संभाला और घायल भी हुए। लेकिन जैसे ही पुलिस की बंदूकें गरजीं, मेहनूर के सीने को गोलियों ने चीर दिया। अस्पताल पहुँचते-पहुँचते दरिंदे का 'गेम ओवर' हो चुका था।मुठभेड़ की जगह से पुलिस को जो जखीरा मिला है, वो चौंकाने वाला है एक 32 बोर की पिस्टल और एक .315 बोर का तमंचा भारी मात्रा में जिंदा कारतूस।जुर्म की दुनिया में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल।IG लखनऊ रेंज ने जिस अपराधी पर 50 हजार का इनाम घोषित किया था, उसे पुलिस ने 24 घंटे में मिट्टी में मिला दिया। एक दर्जन से ज्यादा मुकदमों का बोझ लेकर घूमने वाले इस अपराधी का अंत होते ही पूरे हरदोई ने राहत की सांस ली है।आज हरदोई की गलियों में बस एक ही चर्चा है— "इंसाफ की गोली ने कलेजे को ठंडक पहुँचा दी!"
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