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मंत्री ने कल तुड़वाई पुलिया,अब सवाल-इसे बनवाया किसने और कार्रवाई कब होगी?

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 मंत्री ने कल तुड़वाई पुलिया,अब सवाल-इसे बनवाया किसने और कार्रवाई कब होगी?



हरदोई में भीषण जलभराव के बीच आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने धन्नूपुरवा पहुंचकर मौके पर ही जेसीबी चलवाई और जलनिकासी में बाधक अतिक्रमण हटवाया। नाले पर बनी पुलिया को भी जेसीबी से हटाया गया, ताकि बारिश का पानी आगे निकल सके। मौके की स्थिति देखकर मंत्री ने अधिशासी अधिकारी को फटकार लगाई और सवाल किया कि जब यह पुलिया जलनिकासी में बाधक थी तो इसे पहले क्यों नहीं हटाया गया? मंत्री ने नगर पालिका के काम पर असंतोष जताते हुए नालों के सभी मेन एग्जिट पॉइंट तत्काल चिह्नित कर जलनिकासी रोकने वाले अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। गलत तरीके से पुलिया-पुल बनाकर नाले का पानी रोकने वालों के खिलाफ एफआईआर कराने को कहा। साथ ही सार्वजनिक संपत्ति पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और भूमाफिया व अवैध प्लॉटिंग पर भी शिकंजा कसने के निर्देश दिए।


लेकिन मंत्री के एक्शन के बाद अब कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर धन्नूपुरवा के नाले पर यह पुलिया किसने बनवाई? कब बनी? कितने समय से यहां मौजूद थी? किसकी अनुमति से बनाई गई? इसे बनाने का उद्देश्य क्या था और क्या इसके निर्माण का कोई अभिलेख नगर पालिका के पास है? यदि यह अवैध थी और जलनिकासी बाधित कर रही थी तो निर्माण के समय जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी कहां थे? क्या पुलिया का इस्तेमाल किसी निजी जमीन, प्लॉटिंग या आवागमन के लिए किया जा रहा था? अवैध प्लॉटिंग से इसका संबंध है तो सिर्फ पुलिया हटाना पर्याप्त होगा या निर्माण कराने वालों पर एफआईआर, जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई भी होगी? मंत्री ने कार्रवाई के निर्देश तो दे दिए, लेकिन अब यह भी देखना होगा कि जिम्मेदारी किसकी तय होती है।


सबसे बड़ा सवाल यही है कि बारिश के बाद शहर में जलभराव और आफत आने पर ही नालों की सफाई, अतिक्रमण और जलनिकासी की व्यवस्था का ख्याल क्यों आता है? अगर नाले का रास्ता पहले से बाधित था तो बारिश से पहले निरीक्षण क्यों नहीं हुआ? नालों के मेन एग्जिट पॉइंट की नियमित निगरानी क्यों नहीं की गई? क्या पूरे शहर में ऐसी पुलियाओं, अतिक्रमणों और जलनिकासी रोकने वाले निर्माणों का सर्वे कराया जाएगा? मंत्री ने लापरवाह अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई की चेतावनी दी है। 


उधर अतिवृष्टि से हुए नुकसान पर मुख्यमंत्री के निर्देश के तहत खरीफ, गन्ना, तिल समेत खराब फसलों का तत्काल सर्वे कर किसानों को मुआवजा देने, गिरे पक्के-कच्चे मकानों और पशुधन के नुकसान की भरपाई तथा कच्चे मकानों में रहने वाले पात्र परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना अथवा प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। अब असली सवाल है—जेसीबी चलने के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब और कितनी होगी?

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