फर्जी मार्कशीट से बनी थी आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री,पूर्व प्रधान की पत्नी कमला सिंह पर FIR दर्ज, नौकरी भी गई
हरदोई। सत्ता और रसूख के दम पर फर्जी कागजातों के सहारे सरकारी नौकरी हथियाने के खेल का आखिरकार पर्दाफाश हो गया है। विकासखंड बाबन के ग्राम पंचायत सकाहा प्रथम में फर्जी हाईस्कूल अंकपत्र के आधार पर आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री की कुर्सी पर काबिज कमला सिंह की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। जिलाधिकारी के कड़े रुख के बाद आरोपी महिला के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने की संगीन धाराओं में एफआईआर एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
मामले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब राजवती नामक महिला ने आईजीआरएस पोर्टल पर एक शिकायती प्रार्थना पत्र दर्ज कराया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आंगनबाड़ी केंद्र सकाहा प्रथम पर तैनात कमला सिंह (पत्नी अनिल कुमार सिंह 'अंगद'—जो पद पर रहते वक्त तत्कालीन ग्राम प्रधान भी थे) ने कूटरचित शैक्षणिक दस्तावेजों का सहारा लेकर यह नौकरी हासिल की थी।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जब शिव संकट हरण संस्कृत महाविद्यालय, सकाहा हरदोई के प्रधानाध्यापक से कमला सिंह के वर्ष 1988 के हाईस्कूल अंकपत्र की जांच कराई गई, तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई।
कॉलेज रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 1988 के अनुक्रमांक 31045 पर कमला सिंह का नहीं, बल्कि मालती पत्नी रामपाल सिंह का नाम दर्ज था।
इससे स्पष्ट हो गया कि तत्कालीन प्रधानपति के रसूख का इस्तेमाल कर फर्जी मार्कशीट के जरिए यह नियुक्ति हथियाई गई थी।जांच में धांधली की पुष्टि होते ही जिला कार्यक्रम अधिकारी ने जिलाधिकारी के अनुमोदन पर 23 जून 2026 को कमला सिंह की संविदा सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दीं।इसके बाद, जिलाधिकारी के निर्देश पर बाबन की बाल विकास परियोजना अधिकारी सारिका सिंह ने थाना बेहटा गोकुल पहुंचकर तहरीर दी। पुलिस ने आरोपी कमला सिंह के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है।थानाध्यक्ष मार्कंडेय सिंह के अनुसार, मामले में आपराधिक धाराओं के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और पुलिस निष्पक्ष जांच कर अग्रिम विधिक कार्रवाई कर रही है।
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