न्यायालय के नकल विभाग में दूर हुई अड़चन, अब आसानी से मिलेंगी पुलिस व अन्य रिपोर्टों की नकलें
बरेली। बरेली न्यायालय परिसर स्थित नकल विभाग में पिछले कई दिनों से पुलिस रिपोर्ट समेत अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों और प्रपत्रों की नकल प्राप्त करने में आ रही अड़चन का समाधान हो गया है। अधिवक्ता शंकर कुमार सक्सेना की पहल के बाद नकल विभाग में आवश्यक रिपोर्टों और दस्तावेजों की नकल जारी करने की प्रक्रिया फिर से शुरू होने की जानकारी सामने आई है। इससे मुकदमों की पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं के साथ-साथ वादकारियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
पिछले कई दिनों से नकल विभाग में पुलिस रिपोर्ट तथा अन्य आवश्यक न्यायिक प्रपत्रों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध नहीं होने के कारण अधिवक्ताओं और वादकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। खासतौर पर जमानत प्रार्थना पत्रों और मुकदमों की पैरवी के दौरान आवश्यक दस्तावेज समय से उपलब्ध नहीं होने से न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहे थे। इस समस्या को लेकर अधिवक्ताओं की ओर से बरेली बार एसोसिएशन के माध्यम से भी समाधान की मांग उठाई गई थी।
समस्या का समाधान नहीं होने पर अधिवक्ता शंकर कुमार सक्सेना ने मामले को नियमों के आधार पर संबंधित अधिकारी के समक्ष रखने की पहल की।
'जनरल रूल्स क्रिमिनल' की पुस्तक लेकर प्रभारी अधिकारी के समक्ष पहुंचे अधिवक्ता
अधिवक्ता शंकर कुमार सक्सेना के अनुसार, 24 सितंबर को वह नकल विभाग के मुंसिरिम रमेश बाबू के साथ नकल विभाग के प्रभारी अधिकारी एडीजे-5 के चैंबर में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने 'जनरल रूल्स क्रिमिनल' की पुस्तक प्रस्तुत करते हुए संबंधित नियमों की ओर प्रभारी अधिकारी का ध्यान आकर्षित किया।
अधिवक्ता शंकर कुमार सक्सेना ने प्रभारी अधिकारी के समक्ष यह जानकारी लेने का प्रयास किया कि क्या पुलिस रिपोर्ट अथवा अन्य रिपोर्टों की नकल जारी करने पर रोक लगाने के संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से कोई नया सर्कुलर अथवा निर्देश जारी किया गया है। उनका कहना था कि यदि ऐसा कोई नया आदेश जारी नहीं हुआ है तो नकल जारी करने की प्रक्रिया पर रोक का विधिक आधार स्पष्ट होना चाहिए।
उन्होंने संबंधित नियमावली का हवाला देते हुए आवश्यक न्यायिक अभिलेखों की नकल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष रखा। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रभारी अधिकारी एडीजे-5 ने प्रस्तुत की गई 'जनरल रूल्स क्रिमिनल' की पुस्तक को अध्ययन के लिए रख लिया तथा संबंधित नियमों की समीक्षा करने की बात कही।
लंच के बाद नकल जारी करने के निर्देश मिलने की जानकारी
अधिवक्ता शंकर कुमार सक्सेना की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, नियमावली का अवलोकन किए जाने के बाद उसी दिन लंच के पश्चात नकल विभाग की कार्यप्रणाली में बदलाव हुआ। नकल विभाग के मुंसिरिम रमेश बाबू ने बताया कि प्रभारी अधिकारी एडीजे-5 की ओर से आवश्यक रिपोर्टों और प्रपत्रों की नकल जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके बाद नकल विभाग में लंबित महत्वपूर्ण रिपोर्टों एवं अन्य अभिलेखों की प्रतियां जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इससे उन अधिवक्ताओं और वादकारियों को राहत मिली, जिन्हें मुकदमों से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों की नकल प्राप्त करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने भी की पहल की सराहना
नकल विभाग से जुड़ी समस्या को नियमों के आधार पर संबंधित अधिकारी के समक्ष उठाने के लिए अधिवक्ता शंकर कुमार सक्सेना के प्रयास की न्यायालय परिसर में चर्चा रही। वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व बार अध्यक्ष अरविंद श्रीवास्तव ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से उनके प्रयास की सराहना करते हुए उत्साहवर्धन किया।
अधिवक्ताओं का कहना है कि आवश्यक न्यायिक दस्तावेजों की नकल समय से उपलब्ध होने से मुकदमों की पैरवी में सुविधा होगी। वहीं वादकारियों को भी जरूरी अभिलेख प्राप्त करने के लिए बार-बार नकल विभाग के चक्कर लगाने से राहत मिल सकेगी।
2024 में भी नकल विभाग की व्यवस्था को लेकर उठाई थी आवाज
अधिवक्ता शंकर कुमार सक्सेना का नकल विभाग से जुड़ी समस्याओं को लेकर यह पहला प्रयास नहीं बताया जा रहा है। वर्ष 2024 में भी नकल विभाग में अधिवक्ताओं के प्रवेश और जरूरी दस्तावेजों की नकल प्राप्त करने को लेकर समस्या सामने आई थी। उस समय नकल विभाग के दरवाजे बंद रहने के कारण बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं को अपने कामकाज और आवश्यक कागजात प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।
बताया गया कि उस समय भी अधिवक्ता शंकर कुमार सक्सेना ने मामले को लेकर आवाज उठाई और आंदोलन के माध्यम से विरोध दर्ज कराया था। उनके प्रयास के बाद नकल विभाग के दरवाजे खुलवाए गए थे, जिससे अधिवक्ताओं को हो रही परेशानी का समाधान हुआ था।
अब व्यवस्था सुचारू रहने की उम्मीद
वर्तमान में नकल विभाग में रिपोर्टों और अन्य आवश्यक अभिलेखों की नकल जारी करने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अधिवक्ताओं और वादकारियों को उम्मीद है कि यह व्यवस्था आगे भी नियमित रूप से सुचारू बनी रहेगी। इससे न्यायिक कार्यों में आवश्यक दस्तावेज समय से उपलब्ध हो सकेंगे और मुकदमों की पैरवी में अनावश्यक अड़चन कम होगी।
उक्त समस्त जानकारी अधिवक्ता शंकर कुमार सक्सेना की ओर से उपलब्ध कराई गई है।
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