🚨 रामलीला मंच पर ये कैसा भेदभाव?
जब सुहेल का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया, तो वरिष्ठ कलाकार पैट्रिक दास के जन्मदिन पर क्यों नहीं?
शाहजहांपुर। ओसीएफ की श्रीरामलीला इन दिनों मंचन से ज्यादा अपने आयोजनों को लेकर सुर्खियों में है। पिछले दिनों मंच परिसर में कलाकार मोहम्मद सुहेल का जन्मदिन धूमधाम से मनाए जाने की चर्चा सोशल मीडिया पर खूब हुई। फिल्मी गानों पर डांस से लेकर सांकेतिक रूप से बोतल हाथ में लेकर शराबी की भूमिका तक का वीडियो चर्चा का विषय बना।
लेकिन अब इसी रामलीला मंच से एक दूसरा सवाल उठ रहा है...
मंच के वरिष्ठ कलाकार और पूर्व निदेशक पैट्रिक दास का जन्मदिन क्यों नहीं मनाया गया?
बताया जा रहा है कि सितंबर में पैट्रिक दास का जन्मदिन था, लेकिन उनके जन्मदिन पर वैसा आयोजन नहीं हुआ, जैसा सुहेल के जन्मदिन पर देखने को मिला था।
यही अंतर अब कुछ कलाकारों और क्रिश्चियन समाज के लोगों को खटक रहा है। सवाल उठ रहा है कि क्या जन्मदिन मनाने के मामले में भी अलग-अलग मापदंड हैं?
सवाल इसलिए भी बड़ा है क्योंकि सुहेल और पैट्रिक दास दोनों ही अल्पसंख्यक समुदायों से आते हैं, फिर एक के जन्मदिन पर उत्सव और दूसरे के जन्मदिन पर खामोशी क्यों?
श्रीराम की लीला का मंचन करने वाली संस्था से लोग यह भी पूछ रहे हैं कि जब रामायण के प्रसंग निषादराज गुह, माता शबरी और केवट जैसे पात्रों के प्रति सम्मान, आत्मीयता और सामाजिक समरसता का संदेश देते हैं, तो उसी रामलीला मंच पर किसी कलाकार को अपने साथ भेदभाव महसूस होने की स्थिति क्यों पैदा हो रही है?
👉 क्या ओसीएफ प्रबंधन ने इस पूरे मामले का संज्ञान लिया है?
👉 क्या रामलीला समिति के पास दोनों कलाकारों के जन्मदिन को लेकर अलग-अलग व्यवस्था का कोई स्पष्ट कारण है?
👉 क्या पैट्रिक दास से इस संबंध में कोई बात की गई?
👉 क्या यह महज संयोग है या वाकई कोई भेदभाव हुआ?
इन सवालों का जवाब ओसीएफ प्रबंधन और रामलीला समिति को देना चाहिए।
क्योंकि बात सिर्फ एक जन्मदिन की नहीं है...
बात उस संदेश की है, जो श्रीराम की लीला के मंच से समाज तक पहुंचता है।
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