#विश्वविद्यालय को मिले कुलसचिव एवं वित्त अधिकारी*
#इसी सत्र से विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों में प्रवेश लेंगे विद्यार्थी*
शाहजहांपुर।
#मुमुक्षु शिक्षा संकुल की समस्त शिक्षण संस्थाओं को उच्चीकृत कर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नवगठित स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय ने प्रशासनिक सुदृढ़ता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा लिया है। मंगलवार को कुलसचिव एवं वित्त अधिकारी की नियुक्ति के साथ विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे की औपचारिक शुरुआत हो गई। विश्वविद्यालय के कुलसचिव के रूप में श्री वीरेंद्र कुमार मौर्य एवं वित्त अधिकारी के रूप में श्री दीपक कुमार रस्तोगी ने कार्यभार ग्रहण किया। उल्लेखनीय है कि श्री वीरेंद्र कुमार मौर्य इससे पूर्व चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ में परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत थे। उन्हें उच्च शिक्षा अनुभाग के द्वारा विगत 24 अप्रैल को जारी आधिकारिक कार्यालय ज्ञाप के द्वारा स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के कुलसचिव के रूप में नवीन कार्यभार प्रदान किया गया था। श्री दीपक कुमार रस्तोगी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में वित्त नियंत्रक के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। नवनियुक्त दोनो अधिकारियों को मुमुक्षु शिक्षा संकुल के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती एवं सचिव प्रोफेसर अवनीश मिश्र ने बधाई व शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर प्रो अनुराग अग्रवाल, डॉ आलोक कुमार सिंह, प्रो कमलेश गौतम, प्रो आलोक मिश्र सहित संस्था के समस्त शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने हर्ष व्यक्त किया। विश्वविद्यालय में प्रशासनिक ढांचे की यह शुरुआत आने वाले समय में शैक्षणिक उत्कृष्टता और संस्थागत विकास के नए आयामों को स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश शासन के द्वारा स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय का गठन शाहजहांपुर में उच्च शिक्षा को नई गति, दिशा एवं आयाम देने के उद्देश्य से किया गया है।
कुलसचिव महोदय ने इस अवसर पर कहा कि प्रशासनिक ढांचे की शुरुआत के साथ ही अब विश्वविद्यालय अपने पूर्ण स्वरूप की ओर तेजी से अग्रसर होगा। इसी सत्र 2026-27 से विश्वविद्यालय एवं सभी सम्बद्ध महाविद्यालयों में विधिवत प्रवेश प्रारंभ होंगे। नए प्रशासनिक नेतृत्व के साथ संस्थान में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में तेजी आएगी। साथ ही, शासन के निर्देशों के अनुरूप विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा।

