पत्रकार की छवि प्रभावित करने वाले सोशल मीडिया प्रसारण को लेकर एफआईआर दर्ज

India100news
0

 पत्रकार की छवि प्रभावित करने वाले सोशल मीडिया प्रसारण को लेकर एफआईआर दर्ज



सीएचसी अधीक्षक से कथित धनराशि मांगने और पत्रकार के संबंध में आपत्तिजनक ऑडियो प्रसारित करने के आरोप


बाराबंकी। पत्रकार की सामाजिक एवं पेशेवर छवि को प्रभावित करने के आरोपों से जुड़ा मामला सामने आया है। एबीपी न्यूज चैनल से जुड़े पत्रकार सतीश कुमार कश्यप की ओर से सोशल मीडिया संचालक अनुज धीमान के विरुद्ध थाना कोतवाली में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराए जाने की बात सामने आई है। शिकायत में कथित तौर पर कूटरचना, जालसाजी, धमकी, धनराशि की मांग और सोशल मीडिया के माध्यम से मानहानि से संबंधित आरोप लगाए गए हैं। मामले में आरोपों की जांच और उनकी सत्यता का निर्धारण संबंधित जांच एजेंसी एवं न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत किया जाना है।


शिकायतकर्ता के अनुसार, अनुज धीमान फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम समेत विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने नाम से खाते संचालित करता है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सीएचसी देवा के अधीक्षक डॉ. संजीव कुमार से कथित रूप से एक लाख रुपये की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि रकम नहीं देने पर चिकित्सक को बदनाम करने और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को सार्वजनिक करने की धमकी दिए जाने की बात सामने आई।


प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित बातचीत के दौरान पत्रकार सतीश कुमार कश्यप का नाम लिया गया और उनके संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। इसके बाद पत्रकार की छवि प्रभावित करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर एक ऑडियो प्रसारित किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इस प्रसारण से अपनी सामाजिक और पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने की बात कही है।


शिकायत के आधार पर दर्ज एफआईआर में लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस द्वारा की जाएगी। समाचार प्रकाशित किए जाने के समय एफआईआर की धाराओं, विवेचना की वर्तमान स्थिति और नामजद व्यक्ति का पक्ष आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार स्पष्ट किया जाना आवश्यक है। आरोपी का पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है; उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।


अन्य शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर उठे सवाल


मामले से जुड़े अन्य आरोपों और शिकायतों को लेकर भी चर्चा सामने आई है। संदौली उमरपुर निवासी अधिवक्ता अजय यादव द्वारा शिकायत दिए जाने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इस शिकायत पर मुकदमा दर्ज हुआ है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इसी प्रकार, उच्चाधिकारियों द्वारा मामले को दबाने, किसी व्यक्ति पर दबाव बनाने या शिकायतों पर कार्रवाई न करने के संबंध में किए गए दावों को आधिकारिक दस्तावेज अथवा संबंधित पक्षों के स्पष्ट बयान के आधार पर ही प्रकाशित किया जाना चाहिए।


मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित शिकायतों पर पुलिस और प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की गई है। सभी पक्षों का पक्ष सामने आने और जांच की प्रगति के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)
10/related/default