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खास हितैषी के लिए पहाड़ सा दर्द: लखन बाबू की लाइव वफादारी और यूटर्न वाली समझदारी

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 खास हितैषी के लिए पहाड़ सा दर्द: लखन बाबू की लाइव वफादारी और यूटर्न वाली समझदारी


शाहजहाँपुर। राजनीति और व्यापार के मैदान में जुगलबंदी की जड़ें कितनी गहरी होती हैं, यह इन दिनों जनपद की सियासी फिजाओं में तैरती चर्चाओं से बखूबी समझा जा सकता है। कहते हैं कि जब अपना सिक्का खोटा हो, तो दूसरों की तिजोरी पर उंगली उठाना आसान हो जाता है। कुछ ऐसा ही हाल इन दिनों लखन प्रताप सिंह का है, जिन्हें अपने करीबी रणनीतिक सारथी राघवेंद्र सिंह उर्फ नीटू के लिए इतना असीम दर्द उठा कि उन्होंने सीधे सत्ता के गलियारे से टकराने की ठान ली। हालांकि, इस वफादारी के खेल में सच और झूठ की पोटली अब बीच चौराहे पर खुल चुकी है।


जनपद में पिछले कई सालों में कई क्षत्रियों के साथ ऊंच-नीच हुई, लेकिन तब लखन बाबू की अंतरात्मा शायद विश्राम पर थी। न तो तब कोई स्वर उठा, न ही कोई फेसबुक लाइव आया। लेकिन जैसे ही खास हमकदम नीटू सिंह पर संकट के बादल मडराए, लखन बाबू का विशेष अनुराग हिलोरें मारने लगा। चर्चा है कि यह प्रेम कम और व्यावसायिक तालमेल बिगड़ने का डर ज्यादा था।उसे बचाने के लिए ढाल बनना तो लाजमी ही था।


शुरुआत में लखन प्रताप सिंह ने फेसबुक लाइव के जरिए भाजपा सांसद अरुण सागर पर आरोपों की झड़ी लगा दी। तर्क दिया गया कि सांसद महोदय नीटू सिंह और उनके परिवार को जबरन प्रताड़ित कर रहे हैं। लेकिन जैसे ही नीटू सिंह की गालियों वाली मधुर वाणी का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लखन बाबू के पैरों तले जमीन खिसक गई। राजनीति में यूटर्न कैसे लिया जाता है, इसका जीवंत उदाहरण पेश करते हुए लखन प्रताप तुरंत बैकफुट पर आ गए और कार्रवाई की बात करने लगे।



जब हवा बदली, तो लखन बाबू ने नया राग छेड़ दिया। अब आरोप लगा कि सांसद महोदय एक जमीन सस्ते में खरीदना चाहते थे, जिसे नीटू के भाई मुकेश सिंह ने सही दाम पर खरीद लिया। इसी रंजिश में मुकेश को जेल भिजवा दिया गया। दिलचस्प बात यह है कि वही मुकेश सिंह अजीजगंज फायरिंग मामले में पिछले तीन महीनों से एसओजी और पुलिस की आंखमिचौली का हिस्सा थे। अब गिरफ्तारी हुई, तो उसे सियासी रंजिश का जामा पहनाया जा रहा है।


इधर, सांसद अरुण सागर ने भी साफ कर दिया है कि उनका जमीन के किसी भी खरीद-फरोख्त से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने लखन प्रताप के आरोपों को बेबुनियाद करार देते हुए कहा कि ये लोग जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। असलियत तो यह है कि प्लॉटिंग के गठजोड़ में जब अपना व्यक्ति फंसता दिखा, तो लखन बाबू ने आरोपों की ढाल तैयार कर ली।


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