इस दुकान पर औरतों का आना मना है', प्रयागराज में मालिक हुआ मजबूर, पीछे का सच कड़वा है
सोचिए, कोई दुकानदार दिन-रात भगवान से मन्नत मांगे कि उसकी दुकान पर बोहनी ही न हो, तो आप क्या कहेंगे? जाहिर है, माथा पीट लेंगे. लेकिन यूपी के प्रयागराज (राजापुर) में एक ऐसी ही किराना दुकान है, जिसके मालिक घनश्याम बाबा ने अपनी दुकान के बाहर लिखवा दिया है, "इस दुकान पर औरतों का आना मना है, और हे भगवान!
कम से कम ग्राहक भेजना." जैसे ही इस अतरंगी बोर्ड की तस्वीर सोशल मीडिया पर आई, लोग हैरान रह गए. हर कोई सोचने लगा कि आखिर इस अनोखे 'बायकाट' के पीछे का चक्कर क्या है?
जब लोग घनश्याम बाबा के पास पहुंचे, तो उन्होंने जो दर्द बयां किया, वह वाकई सोचने पर मजबूर करता है. बाबा ने बताया कि यह कोई पब्लिसिटी स्टंट नहीं, बल्कि उनकी मजबूरी है. दरअसल, शाम ढलते ही उनकी दुकान के आस-पास पियक्कड़ों यानी शराबियों का डेरा जम जाता है. नशे में धुत ये लोग वहां से गुजरने वाली महिलाओं पर फब्तियां कसते थे और बदतमीजी करते थे. रोज-रोज के इस तमाशे और मोहल्ले के खराब होते माहौल से तंग आकर बाबा ने यह कड़ा कदम उठाया.
उन्होंने सोचा कि न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी. जब महिलाएं दुकान पर आएंगी ही नहीं, तो शराबी भी वहां तमाशा नहीं करेंगे. अब इस मामले को लेकर सोशल मीडिया दो धड़ों में बंट गया है. कुछ लोग घनश्याम बाबा की लाचारी को जायज मान रहे हैं कि उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के लिए अपनी कमाई की परवाह नहीं की. वहीं, दूसरी तरफ एक बड़ा तबका यह सवाल उठा रहा है कि "गुनाह करे कोई और सजा भुगते कोई और?" आखिर शराबियों की गुंडागर्दी की सजा महिलाओं को क्यों मिले? लोगों का साफ कहना है कि सड़क छाप मजनुओं और हुड़दंगियों को ठीक करना पुलिस-प्रशासन का काम है, न कि महिलाओं के आने पर पाबंदी लगाना. यह भी पढ़ें | IIT दिल्ली का गोल्ड मेडलिस्ट इंजीनियर बन गया संन्यासी, बोला- इंसान भीतर से खोखला होता जा रहा हैयह भी पढ़ें | रेलवे ग्रुप डी में कितनी तनख्वाह मिलती है? कर्मचारी ने दिखाई सैलरी स्लिप, लोग बोले- ये नामुमकिन है
