*एन0एच0एम0 कर्मियों ने सरकार के ट्रान्सफर नीति पर खड़े किए सवाल, नीति को बताया छलावा*
*बस्ती* - वर्षों से स्थानान्तरण की बाट जोह रहे उत्तर प्रदेश के एनएचएम कर्मियों ने सरकार द्वारा जारी स्थानान्तरण नीति पर सवाल खड़ा करते हुए उसे छलावा बताया है और कहा है कि आनन - फानन में सरकार द्वारा कर्मियों की जो स्थानान्तरण नीति जारी की गयी है उससे बहुत गिने चुने कर्मी ही स्थानान्तरण का लाभ प्राप्त कर पायेंगें , इसलिए सरकार को ऐसी स्थानान्तरण नीति जारी करनी चाहिए जिससे सभी एनएचएम कर्मी समान रूप से स्थानान्तरण का लाभ प्राप्त कर सकें ।
मिली जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य महकमें का लगभग 70% हिस्सा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी कवर करते हैं । यदि ये मिशन कर्मचारी अपनी एकता पर आ जाएं तो सरकारी तंत्र को घुटनों पर आने में ज्यादा समय नहीं लगेगा । दशकों से अल्प मानदेय के सहारे घर - परिवार का त्याग कर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी राष्ट्र व प्रदेश की सेवा में लगे हैं । अपने जिंदगी की परवाह किए बगैर कोरोना जैसी घातक महामारी को मात देने में इन संविदा कर्मियों ने सरकार का हाथ जितने मजबूती से थामा था उसके बाद इन कर्मियों के जीवन में कुछ बदलाव तो जरूर बनता था परन्तु ऐसा कुछ भी नहीं हो पाया । बिना वित्तीय भार के मिलने वाले स्थानान्तरण का लाभ भी एनएचएम कर्मियों को वर्षों से नहीं मिल पाया है और अब जब सरकार द्वारा इन कर्मियों के स्थानान्तरण पर कोई नीति बनी भी तो उसमें इतने पेंच फंसा दिए गए हैं कि कुछ गिने - चुने ही कर्मचारी उससे स्थानान्तरित होंगें बाकी अपने पूर्व के हालातों में लड़ने हेतु मजबूरी में फंसे रहेंगे । नाम न छापने की शर्त पर तमाम कर्मचारियों ने बताया कि सरकार द्वारा जारी स्थानान्तरण नीति मात्र छलावा है और सभी संविदा कर्मियों को स्थानान्तरण लाभ प्रदान करने हेतु सरकार द्वारा ऐसी पारदर्शी नीति बनानी चाहिए जिससे सभी को बिना किसी भेदभाव के स्थानान्तरण का लाभ मिल सके ।


