प्रदूषण नियंत्रण पर खर्च हो गए 12 हजार करोड़, अब भी 90% शहरों की हवा 'जहरीली'; NCAP के नतीजों पर सवाल

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 प्रदूषण नियंत्रण पर खर्च हो गए 12 हजार करोड़, अब भी 90% शहरों की हवा 'जहरीली'; NCAP के नतीजों पर सवाल



नई दिल्ली। देश के शहरों को स्वच्छ हवा देने के लिए सात साल में 12,087 करोड़ रुपये खर्च किए गए, इसके बावजूद 90 प्रतिशत शहरों में प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं हो सका है।


केंद्र सरकार के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत शामिल इन 130 शहरों में से वित्त वर्ष 2025-26 में 117 शहरों में पीएम 10 का वार्षिक औसत स्तर राष्ट्रीय मानक से अधिक रहा। केवल 13 शहर ही निर्धारित सीमा तक पहुंच सके।


राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं आंकड़े


दिल्ली की स्थिति भी चिंताजनक है। 2016 से 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में पीएम 10 और पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर किसी भी साल राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं रहा। 2025 में पीएम 10 का स्तर 197.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो राष्ट्रीय मानक 60 से 3.3 गुना अधिक है।


वहीं, पीएम 2.5 का वार्षिक औसत 96.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ, जबकि इसका मानक 40 है। यह भी निर्धारित सीमा से करीब 2.4 गुना अधिक रहा।


लक्ष्य के बावजूद नहीं सुधरी तस्वीर


सेंटर फार रिसर्च आन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के स्वतंत्र विश्लेषण के अनुसार जनवरी 2019 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के सात साल बाद भी प्रदूषण नियंत्रण की तस्वीर संतोषजनक नहीं है। शुरुआत में पीएम 10 में 20 से 30 प्रतिशत कमी का लक्ष्य रखा गया था, बाद में इसे 2025-26 तक 40 प्रतिशत कमी लाने या वार्षिक औसत स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंचाने के लक्ष्य में बदल दिया गया। इसके बावजूद मानक से ऊपर रहने वाले शहरों की संख्या 2019-20 के 112 से बढ़कर 2025-26 में 117 हो गई।


खर्च और नतीजों का लेखा-जोखा


एनसीएपी के तहत जारी राशि 16,824 करोड़ रुपये


कुल खर्च 12,087 करोड़ रुपये


जारी राशि में से खर्च करीब 72 प्रतिशत


पीएम 10 मानक से ऊपर वाले शहर (2019-20) 112


पीएम 10 मानक से ऊपर वाले शहर (2025-26) 117


2025-26 में मानकों के अनुरूप शहर 13


2019-20 के मुकाबले पीएम 10 बढ़ने वाले शहर 43


इन 43 शहरों का कुल खर्च 2,857 करोड़ रुपये


(नोट : खर्च के आंकड़े एनसीएपी के तहत शामिल 130 शहरों के कुल आंकड़े हैं, केवल दिल्ली के नहीं)


दिल्ली में प्रदूषण का स्तर (माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में)


वर्षपीएम 10पीएम 2.52016284.2131.32020180.394.02023205.8100.62024211.5104.52025197.396.4


शहरों में कार्यक्रम शुरू होने के बाद बढ़ा प्रदूषण


आंकड़ों के अनुसार, 2019-20 की तुलना में 2025-26 में 43 शहरों में पीएम 10 का स्तर बढ़ा। इन शहरों ने एनसीएपी के तहत कुल 2,857 करोड़ रुपये खर्च किए। वहीं, 23 शहरों में प्रदूषण का स्तर 2017-18 के मुकाबले बढ़ा था।


इन शहरों में बढ़ा पीएम 10 (माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में)


शहर खर्च (करोड़ रुपये) पीएम 10 में बदलाव


नवी मुंबई 80 59.3 प्रतिशत वृद्धि


नासिक 88 40.4 प्रतिशत वृद्धि


पुणे 289 24.7 प्रतिशत वृद्धि


चेन्नई 449 2019-20 के मुकाबले 20 प्रतिशत वृद्धि


जयपुर 353 14.5 प्रतिशत वृद्धि


बेंगलुरु 313 6.8 प्रतिशत वृद्धि


अब खर्च नहीं, नतीजों की जवाबदेही जरूरी


सीआरईए के मुख्य विश्लेषक मनोक कुमार कहते हैं इस कार्यक्रम के अगले चरण में शहरों की सीमाओं से आगे बढ़कर पूरे क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण की योजना बनाई जाए।


उद्योगों, बिजली संयंत्रों, वाहनों और घरेलू ईंधन से होने वाले प्रदूषण के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय किए जाएं। पीएम 10 के साथ पीएम 2.5 और प्रदूषण बढ़ाने वाली गैसीय उत्सर्जन की भी निगरानी हो।

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