🚨 दीपावली आते ही जालौन में सक्रिय हुए कथित फर्जी पत्रकार! टोली बनाकर गांव-गांव घूमने वालों पर उठे सवाल, ग्राम प्रधानों से लेकर डॉक्टरों और ठेकेदारों तक में चर्चा
पत्रकारिता की आड़ में दबाव बनाने और कथित वसूली के आरोपों ने बढ़ाई चिंता, त्योहार के सीजन में प्रतिष्ठानों तक पहुंच रहे कुछ लोग; प्रशासन और पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग
जालौन। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही जनपद में बाजारों की रौनक बढ़ने लगी है। मिठाई की दुकानों से लेकर बड़े प्रतिष्ठानों, अस्पतालों और व्यापारिक संस्थानों तक तैयारियां तेज हैं। लेकिन इसी बीच जनपद में कुछ ऐसे लोगों की सक्रियता भी चर्चा का विषय बनी हुई है, जो कथित तौर पर पत्रकारिता की पहचान लेकर टोली बनाकर गांव-गांव और शहर के अलग-अलग इलाकों में घूम रहे हैं। इनकी गतिविधियों को लेकर ग्राम प्रधानों, निजी अस्पताल संचालकों, डॉक्टरों, ठेकेदारों और व्यापारियों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं होने की बात सामने आ रही है।
आरोप हैं कि कुछ लोग दीपावली के त्योहार से पहले विभिन्न प्रतिष्ठानों, अस्पतालों, क्लीनिकों और ग्राम पंचायतों में पहुंचकर खुद को पत्रकार बताते हैं। कहीं विकास कार्यों की जानकारी लेने के नाम पर वीडियो बनाए जाते हैं तो कहीं अस्पतालों और निजी संस्थानों में पहुंचकर सवाल-जवाब किए जाते हैं। सवाल पूछना और जनहित के मुद्दों को उजागर करना पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन यदि इसी पहचान की आड़ में किसी व्यक्ति पर खबर चलाने का डर दिखाकर दबाव बनाया जाता है या अनुचित लाभ लेने की कोशिश होती है तो यह गंभीर मामला है।
त्योहार आते ही क्यों बढ़ जाती है कथित पत्रकारों की सक्रियता?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल चर्चा में है कि आखिर त्योहारों के आसपास कुछ लोग अचानक इतने सक्रिय क्यों हो जाते हैं? क्या इनका उद्देश्य वास्तव में जनसमस्याओं को उजागर करना है या फिर पत्रकारिता की पहचान का इस्तेमाल करके लोगों पर प्रभाव जमाना?
आरोप है कि कुछ लोग अकेले नहीं बल्कि समूह बनाकर प्रतिष्ठानों और गांवों में पहुंचते हैं। अपने साथ कैमरा और मोबाइल लेकर वीडियो रिकॉर्डिंग करते हैं तथा संबंधित लोगों से सवाल-जवाब करते हैं। कई बार सामान्य बातचीत को भी विवाद का रूप दिए जाने की शिकायतों की चर्चा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
ग्राम प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच भी चर्चा
ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की गुणवत्ता, नाली निर्माण, सड़क निर्माण, मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं की जांच करना पत्रकारिता का वैध और महत्वपूर्ण कार्य है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति जांच के नाम पर ग्राम प्रधानों या पंचायत सचिवों पर अनुचित दबाव बनाने का प्रयास करता है तो इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की जानी चाहिए।
सवाल यह भी है कि क्या ऐसे मामलों में किसी ने पुलिस या जिला प्रशासन को लिखित शिकायत दी है? यदि शिकायतें मिली हैं तो उनकी जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए, ताकि वास्तविक भ्रष्टाचार उजागर करने वालों का काम प्रभावित न हो और किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान भी न होना पड़े।
डॉक्टरों और निजी अस्पतालों तक पहुंचने वालों पर भी सवाल
जनपद के निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में पहुंचकर वीडियो बनाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सवाल पूछने की गतिविधियों को लेकर भी चर्चाएं हैं। यदि किसी अस्पताल में बिना पंजीकरण संचालन, अपात्र व्यक्ति द्वारा इलाज या अन्य स्वास्थ्य संबंधी अनियमितताएं हैं तो उन्हें उजागर करना जनहित का विषय है।
लेकिन अस्पताल की जांच करने का अधिकार संबंधित स्वास्थ्य विभाग और सक्षम अधिकारियों के पास है। किसी भी व्यक्ति को पत्रकारिता या जांच के नाम पर धमकी देने, जबरन वसूली करने अथवा अनुचित लाभ लेने का अधिकार नहीं है। ऐसे मामलों में स्वास्थ्य विभाग को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
ठेकेदारों और व्यापारियों के सामने भी खड़ा हो रहा सवाल
निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार, घटिया सामग्री और सरकारी धन के दुरुपयोग पर सवाल उठाना जरूरी है। इसी तरह व्यापारिक प्रतिष्ठानों में किसी वास्तविक अनियमितता की जानकारी सामने आती है तो उसकी तथ्यात्मक पड़ताल होनी चाहिए।
लेकिन यदि किसी प्रतिष्ठान पर खबर प्रकाशित करने की धमकी देकर दबाव बनाने की कोशिश की जाती है तो यह पत्रकारिता नहीं, बल्कि गंभीर आरोपों वाला मामला बन जाता है। ऐसे मामलों में पीड़ित व्यक्ति को साक्ष्यों के साथ पुलिस से शिकायत करनी चाहिए और पुलिस को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
पत्रकारिता की आड़ में गलत गतिविधियां करने वालों से असली पत्रकारिता बदनाम
पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है। एक जिम्मेदार पत्रकार अपनी खबर तथ्यों, दस्तावेजों और दोनों पक्षों के बयान के आधार पर तैयार करता है। वह अधिकारियों से सवाल पूछता है, जनता की समस्याओं को उठाता है और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करता है।
लेकिन कुछ लोगों की कथित गलत गतिविधियों के कारण उन पत्रकारों की छवि भी प्रभावित होती है, जो वर्षों से ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ जनहित में काम कर रहे हैं।
यह भी समझना जरूरी है कि पत्रकारिता के लिए केवल सरकारी मान्यता या किसी विशेष पहचान पत्र का होना ही एकमात्र कसौटी नहीं है। इसलिए किसी व्यक्ति को बिना प्रमाण फर्जी पत्रकार कहना उचित नहीं होगा। असली सवाल उसके काम, आचरण और कानून के पालन का है।
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा
अब सवाल जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की जिम्मेदारी पर है। यदि जनपद में पत्रकारिता की आड़ में धमकी, अवैध वसूली या अनुचित दबाव बनाने की शिकायतें सामने आ रही हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जिलाधिकारी जालौन और पुलिस अधीक्षक जालौन से अपेक्षा है कि शिकायतकर्ताओं की पहचान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कराई जाए। साथ ही स्वास्थ्य विभाग और संबंधित विभागों को भी अपने-अपने क्षेत्र में वास्तविक अनियमितताओं पर कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रशासन और पुलिस के सामने पांच बड़े सवाल
1. क्या दीपावली के आसपास पत्रकारिता की पहचान लेकर समूहों में घूमने वाले लोगों की गतिविधियों की जांच कराई जाएगी?
2. क्या ग्राम प्रधानों, डॉक्टरों, अस्पताल संचालकों और ठेकेदारों से कथित दबाव या वसूली की कोई लिखित शिकायत मिली है?
3. यदि किसी व्यक्ति को खबर चलाने की धमकी देकर अनुचित लाभ लेने का प्रयास किया जाता है तो पुलिस क्या कार्रवाई करेगी?
4. क्या स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की वास्तविक अनियमितताओं की जांच नियमित रूप से करेगा?
5. क्या जिला प्रशासन ऐसा वातावरण सुनिश्चित करेगा, जिसमें निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों को सम्मान मिले और पत्रकारिता की आड़ में कानून तोड़ने वालों पर कार्रवाई हो?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पत्रकारिता के नाम पर किसी को भी मनमानी करने की छूट कैसे मिल सकती है? यदि आरोप सही हैं तो जांच और कार्रवाई जरूरी है, और यदि आरोप निराधार हैं तो तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने आनी चाहिए।
दीपावली खुशियों और रोशनी का त्योहार है। ऐसे में जनपद में भय और दबाव का माहौल नहीं, बल्कि कानून का राज और निष्पक्ष पत्रकारिता की गरिमा कायम रहनी चाहिए। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और पुलिस विभाग इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट – जनपद जालौन
मोबाइल: 7985978546
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