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उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों की भारी कमी का मुद्दा UPERC में उठा, पहले चरण में 10,000 नियमित पदों पर भर्ती की मांग!

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 ⚡ उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों की भारी कमी का मुद्दा UPERC में उठा, पहले चरण में 10,000 नियमित पदों पर भर्ती की मांग!


वर्टिकल व्यवस्था समाप्त करने की मांग को लेकर अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष से की मुलाकात, दाखिल किया जनहित प्रस्ताव


लखनऊ, 21 अक्टूबर 2026।


उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों की भारी कमी, नियमित भर्ती में लंबे समय से हो रही देरी और वर्टिकल व्यवस्था के प्रभावों को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बड़ा मुद्दा उठाया है। परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के अध्यक्ष अरविंद कुमार तथा आयोग के सदस्य संजय कुमार सिंह और गिरीश कुमार वैश्य से मुलाकात कर जनहित प्रस्ताव दाखिल किया।


इस प्रस्ताव में टैरिफ आदेश 2026-27 के पैरा 3.14.21 के तहत वर्टिकल व्यवस्था की समीक्षा कर उसे समाप्त करने तथा पहले चरण में कम से कम 10,000 रिक्त नियमित पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल शुरू कराने की मांग की गई।


🔴 73,522 स्वीकृत पद, लेकिन नियमित कर्मचारियों की संख्या लगभग 26 हजार होने का अनुमान!


अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 1 अप्रैल 2025 को प्रदेश के बिजली निगमों में नियमित कर्मचारियों के कुल 73,522 पद स्वीकृत थे। परिषद के पास उपलब्ध अनुमान के अनुसार, वर्तमान में नियमित कर्मचारियों की संख्या लगभग 26 हजार है।


यदि इन आंकड़ों की पुष्टि होती है, तो यह स्थिति बिजली व्यवस्था में मानव संसाधन की गंभीर कमी की ओर संकेत करती है। हालांकि, वास्तविक रिक्तियों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए कंपनीवार स्वीकृत पदों, कार्यरत कर्मचारियों और रिक्त पदों का सत्यापन जरूरी है।


परिषद का कहना है कि पिछले छह वर्षों से नियमित भर्ती नहीं होने के कारण बिजली निगमों में कर्मचारियों की कमी गंभीर होती गई है।


⚡ पहले चरण में 10,000 पदों पर भर्ती की मांग


परिषद ने मांग की है कि प्रदेश के बिजली निगमों में रिक्त नियमित पदों को भरने के लिए तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए। पहले चरण में कम से कम 10,000 पदों पर भर्ती की मांग उठाई गई है।


प्रस्तावित भर्ती में प्रमुख रूप से शामिल हैं—


🔹 सहायक अभियंता (AE)

🔹 अवर अभियंता (JE)

🔹 तकनीकी ग्रेड-2 (TG-2)

🔹 लेखा संवर्ग

🔹 बिजली आपूर्ति, रखरखाव और उपभोक्ता सेवाओं से जुड़े अन्य आवश्यक पद


परिषद के मुताबिक, पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित और नियमित कर्मचारियों की तैनाती से बिजली व्यवस्था के संचालन, तकनीकी रखरखाव, फॉल्ट निस्तारण और उपभोक्ता शिकायतों के समयबद्ध समाधान को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।


🔴 वर्टिकल व्यवस्था पर सवाल, समीक्षा के बाद समाप्त करने की मांग


अवधेश कुमार वर्मा ने टैरिफ आदेश 2026-27 के पैरा 3.14.21 के अनुपालन का मुद्दा उठाते हुए वर्टिकल व्यवस्था के वास्तविक प्रभावों का स्वतंत्र एवं पेशेवर एजेंसी से मूल्यांकन कराने की मांग की।


इस समीक्षा में प्रमुख रूप से इन बिंदुओं को शामिल करने की मांग की गई—


✅ उपकेंद्रों और फीडरों पर कर्मचारियों की उपलब्धता।

✅ बिजली के फॉल्ट ठीक करने में लगने वाला समय।

✅ तकनीकी रखरखाव की स्थिति।

✅ उपभोक्ताओं की शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता।

✅ बिजली वितरण व्यवस्था में जवाबदेही और कार्यक्षमता।


परिषद का तर्क है कि यदि समीक्षा में वर्टिकल व्यवस्था से अपेक्षित सुधार नहीं होने और गंभीर कमियां सामने आने की पुष्टि होती है, तो इसे समाप्त कर अधिक प्रभावी, विकेंद्रीकृत और जवाबदेह व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।


⚠️ सवाल सिर्फ कर्मचारियों का नहीं, करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं की सेवा का है!


उत्तर प्रदेश में लगभग 3 करोड़ 82 लाख बिजली उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण, विश्वसनीय और जवाबदेह विद्युत सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन जरूरी है।


बिजली व्यवस्था में केवल संगठनात्मक ढांचे को बदल देना पर्याप्त नहीं है। यदि उपकेंद्रों, फीडरों और वितरण क्षेत्रों में पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध नहीं होंगे, तो तकनीकी समस्याओं के समाधान और उपभोक्ता सेवाओं में सुधार की चुनौती बनी रह सकती है।


इसलिए नियमित भर्ती, कर्मचारियों की वास्तविक संख्या का सत्यापन और वर्टिकल व्यवस्था के परिणामों का निष्पक्ष मूल्यांकन एक साथ किया जाना आवश्यक है।


📌 अब UPERC से क्या अपेक्षा है?


परिषद ने आयोग से इस जनहित के मुद्दे पर प्रभावी कार्रवाई करने तथा भर्ती और वर्टिकल व्यवस्था की समीक्षा के संबंध में समयबद्ध निर्देश जारी करने की अपेक्षा जताई है।


ध्यान देने योग्य बात: 10,000 पदों पर भर्ती और वर्टिकल व्यवस्था समाप्त करने की मांग अभी उपभोक्ता परिषद की ओर से रखी गई मांग है। इसे आयोग द्वारा स्वीकृत निर्णय या भर्ती अधिसूचना नहीं माना जाना चाहिए। आगे की स्थिति आयोग के आदेशों और बिजली निगमों की आधिकारिक कार्रवाई से स्पष्ट होगी।


✊ नियमित भर्ती हो, बिजली कर्मचारियों की कमी दूर हो और उपभोक्ताओं को मिले बेहतर विद्युत सेवा!


कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या केवल विभागीय जरूरत नहीं, बल्कि सुचारु बिजली आपूर्ति, सुरक्षित रखरखाव और जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।


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