1912 पर छह माह में एक करोड़ बिजली उपभोक्ताओं ने दर्ज कराईं शिकायतें, शिकायत निस्तारण में पारदर्शिता के लिए ओटीपी व्यवस्था लागू हो : अवधेश वर्मा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का मानना है कि प्रदेश में वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के बाद बिजली उपभोक्ताओं के पास अपनी समस्याओं के समाधान के लिए मुख्य रूप से 1912 हेल्पलाइन ही एक प्रमुख माध्यम रह गया है। ऐसे में 1912 को प्रभावी, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया को ओटीपी व्यवस्था से जोड़ना बेहद जरूरी है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 के बीच प्रदेश की पांचों बिजली वितरण कंपनियों में 1912 के माध्यम से कुल 99,83,097 शिकायतें दर्ज की गईं। डिस्कॉमवार शिकायतों का विवरण इस प्रकार है—
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम: 22,58,871 शिकायतें
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम: 19,01,765 शिकायतें
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम: 33,77,162 शिकायतें
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम: 17,15,359 शिकायतें
केस्को: 7,29,940 शिकायतें
कुल योग : 99,83,097 ।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि छह माह में एक करोड़ से अधिक शिकायतें दर्ज होना इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश के बिजली उपभोक्ता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए 1912 पर बड़े पैमाने पर निर्भर हैं। ऐसे में शिकायतों का वास्तविक और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करना बिजली कंपनियों और पावर कॉरपोरेशन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ता परिषद की मांग पर पूर्व में विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को शिकायत निस्तारण की कुछ सेवाओं में ओटीपी व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन बिजली कंपनियों द्वारा इसे प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया। इसी कारण आयोग को दोबारा 1912 को प्रभावी बनाने और शिकायत निस्तारण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश देने पड़े।
अवधेश वर्मा ने मांग की कि 1912 पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण के बाद उपभोक्ता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजने की व्यवस्था तत्काल लागू की जाए। जब तक उपभोक्ता ओटीपी के माध्यम से यह पुष्टि नहीं करता कि उसकी समस्या का समाधान हो गया है, तब तक शिकायत को बंद नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से शिकायतों को केवल कागजों में निस्तारित दिखाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा और उपभोक्ताओं का 1912 की शिकायत प्रणाली पर भरोसा मजबूत होगा। बिजली कंपनियों और पावर कॉरपोरेशन को इस दिशा में तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए।


