दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद के संरक्षण की मांग, किरेन रिजिजू से मिला जमीयत उलमा-ए-हिंद का प्रतिनिधिमंडल
📍 नई दिल्ली
दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद और उससे जुड़े कब्रिस्तान की हिफाज़त के लिए जमीयत उलमा-ए-हिंद ने केंद्र सरकार से दखल देने की मांग की है। इस सिलसिले में मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी की क़ियादत में एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात की और मौलाना महमूद असद मदनी की ओर से एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया कि सफदरजंग मकबरे के पीछे स्थित रेस कोर्स मस्जिद धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखती है। जमीयत के मुताबिक, मस्जिद से संबंधित दस्तावेज़ सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद हैं। संगठन ने NDMC की हेरिटेज सूची में मस्जिद का उल्लेख होने और 1977 के दिल्ली गजट में इसका जिक्र दर्ज होने का भी हवाला दिया।
जमीयत ने मस्जिद में नमाज़ियों की आवाजाही पर पाबंदी और बिजली-पानी की आपूर्ति बंद होने की शिकायत उठाते हुए इस स्थिति पर चिंता जताई। प्रतिनिधिमंडल ने आशंका व्यक्त की कि मस्जिद और कब्रिस्तान को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए उनके संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।
ज्ञापन में मांग की गई कि दिल्ली वक्फ बोर्ड और NDMC से पूरे मामले की रिपोर्ट ली जाए तथा संबंधित सरकारी दस्तावेज़ों और कानूनी स्थिति की जांच की जाए। जमीयत ने यह भी कहा कि कानूनी पहलुओं और लागू अदालती आदेशों की जांच किए बिना मस्जिद या कब्रिस्तान को हटाने की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। इसके साथ ही नमाज़ियों की आवाजाही बहाल करने और बिजली-पानी की आपूर्ति दोबारा शुरू करने की मांग की गई।
जमीयत के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल की बातें सुनने के बाद किरेन रिजिजू ने मामले में हर संभव प्रयास करने का भरोसा दिलाया। संगठन ने भी मस्जिद और कब्रिस्तान के संरक्षण के लिए कानूनी रास्ते अपनाने की बात कही।
इस प्रतिनिधिमंडल में मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी के साथ मौलाना मुहम्मद कासिम नूरी, मौलाना कारी आरिफ क़ासमी, हाफिज़ यूसुफ़ आज़मी, मौलाना हारून राही, मौलाना ज़ियाउल्लाह क़ासमी और मौलाना अरशद नदवी शामिल थे।
