मानदेय को लेकर घमासान तेज, बालाजी एंटरप्राइजेज ने कर्मचारियों को थमाया नोटिस

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मानदेय को लेकर घमासान तेज, बालाजी एंटरप्राइजेज ने कर्मचारियों को थमाया नोटिस


 कार्य बहिष्कार को अनुशासनहीनता करार,24 घंटे में जवाब नहीं देने पर सेवा समाप्ति की चेतावनी


पीलीभीत। राजकीय मेडिकल कॉलेज पीलीभीत प्रोजेक्ट में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत पैरामेडिकल स्टाफ के मानदेय को लेकर चल रहे विवाद में अब संबंधित कंपनी बालाजी एंटरप्राइजेज ने आधिकारिक खंडन जारी करते हुए कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस दिया है। कंपनी ने कर्मचारियों के उस आरोप को गलत और भ्रामक बताया है, जिसमें कई माह से मानदेय नहीं मिलने की बात कही गई थी। कंपनी का दावा है कि मई माह का मानदेय कर्मचारियों के बैंक खातों में पहले ही स्थानांतरित किया जा चुका है, जबकि जून और जुलाई माह का भुगतान प्रशासनिक औपचारिकताओं के कारण प्रक्रियाधीन है।


कंपनी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि 21 अगस्त को कर्मचारियों द्वारा सामूहिक रूप से कार्य बहिष्कार किया गया और मीडिया तथा मेडिकल कॉलेज प्रशासन के समक्ष कंपनी पर कई माह का मानदेय रोकने के आरोप लगाए गए। प्रबंधन ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कर्मचारियों से 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा है।

कंपनी ने अपने नोटिस में कहा है कि उसके वित्तीय रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजेक्शन विवरण के अनुसार सभी संबंधित कर्मचारियों के मई माह के मानदेय का पूर्ण भुगतान उनके बैंक खातों में सफलतापूर्वक किया जा चुका है। कंपनी ने भुगतान के बैंक ट्रांसफर रिकॉर्ड को नोटिस के साथ संलग्न किए जाने की बात भी कही है।

प्रबंधन के मुताबिक मई माह का भुगतान हो जाने के बावजूद कर्मचारियों द्वारा तीन माह से वेतन नहीं मिलने की बात कहना तथ्यात्मक रूप से गलत है। कंपनी ने इसे उसकी छवि को सार्वजनिक रूप से नुकसान पहुंचाने का प्रयास बताते हुए सेवा अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करार दिया है।


कंपनी ने स्पष्ट किया है कि जून और जुलाई माह का मानदेय अभी प्रक्रियाधीन है। नोटिस में इसके लिए प्रशासनिक औपचारिकताओं के चलते कुछ दिनों का विलंब होने की बात कही गई है। कंपनी का कहना है कि भुगतान प्रक्रिया को लेकर कर्मचारियों को संबंधित अधिकारियों अथवा स्थानीय सुपरवाइजर से संपर्क करना चाहिए था।

प्रबंधन ने आरोप लगाया कि भुगतान संबंधी समस्या के समाधान के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाने के बजाय कर्मचारियों ने सामूहिक कार्य बहिष्कार का रास्ता अपनाया।

नोटिस में कंपनी ने 21 अगस्त को किए गए कार्य बहिष्कार को गंभीर अनुशासनहीनता बताया है। कंपनी का आरोप है कि बिना किसी पूर्व लिखित नोटिस के अचानक काम बंद करने से ऑपरेशन थिएटर, लैब और इमरजेंसी जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं।

प्रबंधन ने कहा कि अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सीधे मरीजों से जुड़ी होती हैं, इसलिए कर्मचारियों द्वारा अचानक कार्य से विरत होना गंभीर विषय है। कंपनी ने इसे स्वीकार्य नहीं बताते हुए कर्मचारियों को भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न करने की चेतावनी दी है।

कंपनी ने कर्मचारियों से कहा है कि यदि किसी कर्मचारी को मानदेय के भुगतान को लेकर तकनीकी अथवा बैंक संबंधी समस्या थी तो वह अपने बैंक स्टेटमेंट के साथ लखनऊ स्थित कंपनी कार्यालय या स्थानीय सुपरवाइजर से संपर्क कर सकता था। प्रबंधन के अनुसार समस्या के समाधान के लिए निर्धारित माध्यम उपलब्ध होने के बावजूद सामूहिक कार्य बहिष्कार करना उचित नहीं था।

कारण बताओ नोटिस में सभी संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि नोटिस प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर लिखित रूप से यह स्पष्ट करें कि कंपनी पर कथित रूप से झूठे आरोप लगाने, अनुशासनहीनता करने और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करने के मामले में उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों न की जाए।

कंपनी ने यह भी चेतावनी दी है कि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने की स्थिति में सेवा अनुबंध के तहत कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें सेवाएं समाप्त करने का निर्णय भी शामिल है।#strike

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