बीजेपी सांसद बोले- मार्ग बदलाव तकनीकी मजबूरी, साजिश नहीं: गंगा एक्सप्रेस-वे के रूट को लेकर बोले- समाजवादी पार्टी के लोग चिल्ला रहे
नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया। इसके बाद फर्रुखाबाद में एक्सप्रेसवे के रूट को लेकर सोशल मीडिया पर बयानबाजी तेज हो गई और जनप्रतिनिधियों पर भी आरोप लगाए जाने लगे। इसी मुद्दे पर भाजपा कार्यालय में सांसद मुकेश राजपूत ने प्रेस वार्ता की।
सांसद मुकेश राजपूत ने कहा कि परियोजना के मार्ग में बदलाव किसी राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा नहीं, बल्कि तकनीकी बाध्यताओं का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूट तय करते समय कई तकनीकी पहलुओं का ध्यान रखा गया है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश को गंगा एक्सप्रेसवे देने के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का आभार जताया। साथ ही बताया कि फर्रुखाबाद के लोग यहां से करीब 25 से 26 किलोमीटर की दूरी तय कर एक्सप्रेसवे तक पहुंच सकते हैं।
एनजीटी की रिपोर्ट पढ़नी चाहिए
सांसद ने समाजवादी पार्टी और कुछ अन्य लोगों द्वारा लगाए जा रहे 'गंगा एक्सप्रेस ले गए खन्ना, फर्रुखाबाद चूसे गन्ना' जैसे आरोपों को भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि इन लोगों को एनजीटी की रिपोर्ट पढ़नी चाहिए, जिसमें स्पष्ट उल्लेख है कि गंगा एक्सप्रेसवे गंगा नदी से 12 से 15 किलोमीटर की दूरी पर ही बनाया जा सकता है।
उन्होंने आगे बताया कि इस दूरी पर जाने पर बदायूं मार्ग पड़ता है, जो फर्रुखाबाद-बदायूं स्टेट हाईवे है और स्टेट हाईवे के ऊपर एक्सप्रेसवे नहीं बनाया जा सकता। यदि रूट और हटाया जाता है तो रामगंगा नदी आ जाती है, जिससे निर्माण संभव नहीं होता।
15-25 किलोमीटर की दूरी अधिक नहीं मानी जाती
सांसद ने उदाहरण देते हुए कहा कि फर्रुखाबाद के लिए एक्सप्रेसवे महज 26 किलोमीटर दूर है, जबकि नोएडा के लोगों को एयरपोर्ट के लिए 35 किलोमीटर और नरेला के लोगों को जेवर एयरपोर्ट के लिए करीब 40 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। उनके अनुसार 15-25 किलोमीटर की दूरी अधिक नहीं मानी जाती।
फर्रुखाबाद की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक लिंक एक्सप्रेसवे भी स्वीकृत किया गया है। करीब 91 किलोमीटर लंबा यह लिंक एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा, जिससे फर्रुखाबाद देश के अन्य एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ जाएगा।
सपा पर साधा निशाना
सांसद ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा नेता गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर बेवजह बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा शासनकाल में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनाया गया, जिसे सीधे रूट की बजाय घुमावदार तरीके से तैयार किया गया, जिससे दूरी बढ़ गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय फर्रुखाबाद को एक्सप्रेसवे से जोड़ने की मांग पर ध्यान नहीं दिया गया। साथ ही कहा कि कन्नौज और मैनपुरी में बेहतर सड़क और बिजली व्यवस्था थी, जबकि फर्रुखाबाद में विकास की कमी रही।
सांसद ने कहा कि अब प्रदेश में होने वाले विकास कार्यों का लाभ सभी जिलों को मिल रहा है और फर्रुखाबाद भी इससे अछूता नहीं है।
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