न जाँच न पड़ताल 50% कमीशन पर अधिकारी दलाल की संठगाँठ से आवास स्वीकृत सीधे पैसा खातों में
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शाहजहाँपुर-UP/नगर निगम के डूडा कार्यालय में अधिकारियों दलालों की बल्ले बल्ले प्रधान मंत्री आवासों में जमकर हो रहा घोटाला भ्रष्टाचार । अधिकारी दलाल के माध्यम से परधान मंतरी आवास 2.50 लाख में 50% कमीशन पर ग्रामीणों में शहर के पते पर दे रहे प्रधान मंत्री आवास । मामला स्वीकृत आवासों पर लिखे मोवाइल न० से जानकारी की तो पता चला कि यह स्वीकृत आवास दर्शाये गये पते पर बने ही नहीं है इन स्वीकृत आवास स्वामी निघोना में मिले जब गाँव जाकर लिस्ट के अनुसार जानकारी की तो वह भी लोग निघोना में निवास करते मिले जिनके सभी के पक्के व दो मंजिल आवास बने हुये मिले । स्वीकृत आवासों का पैसा सीधे आवेदन करता के खाते में भेज कर 50% का बंदरबाँट किया गया है । जब नगर निगम के डूडा कार्यालय के A.P.O से फोन पर सम्पर्क किया तो बताया हाँ शहर के आवास निघोना के ग्रामीणों के स्वीकृत मिले हैं अब सवाल यह उठता है कि यह आवास की जगह पते की बिना जाँच किये हुये कैसे स्वीकृत हुये और किस अधिकारी कर्मचारी ने उक्त पते पर आवासों का जियो टैग कैसे हुआ और किसने किया । यह एक निघोना का ही केवल मामला नही है सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि नगर निगम डूडा के अधिकारियों ने दलालों के माध्यम से कई गाँवों में आवास स्वीकृत किये हैं और नगर में 90% ऐसे लोगों को प्रधान मंत्री आवास स्वीकृत कर दिये हैं जिनके पहले से ही पक्के व दो मंजिल मकान बने हुये है । ऐसे भ्रष्ट और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों दलालों की जाँच कराकर कब कार्यवाही होगी । मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टालरेन्स नीति में जमकर बट्टा लगा रहें अधिकारी,ठेकेदार ,दलाल। नगर निगम में जमकर हो रहा भ्रष्टाचार घोटाला जिम्मेदार अधिकारी बने मूकदर्शक । सूत्र क्योंकि नगर निगम के डूडा अधिकारियों ने 50% कमीशन पर दलाल के माध्यम से निघोना गाँव के ग्रामीणों के प्रधान मंत्री आवास शहर का पता दिखाकर उनके नाम पर भेज दिये । स्वीकृत आवासों पर लिखे मोवाइल न० पर जब सम्पर्क किया तो वह सभी फोन पर निघोना गाँव के लोग निकले स्वीकृत आवास शहर के पते के स्थान से गायब हैं न उनका शहर में कोई जमीन मकान पहले से है न था। ग्रामीणों ने बताया कि निघोना गाँव के एक दलाल ने 50% रू० तय करके अधिकारियों की मिलीगत से शहरी प्रधान मंत्री आवास ब्लाक भावलखेडा के ग्राम निघोना के ग्रामीणों के आवाल स्वीकृत कराकर बंदरबाँट किया गया है । आवास सवीकृत होने से पहले अधिकारी करमचारी आवेदन पर लिखे पते पर पहुँच कर मकान की सथित देखते है तब आवास स्वीकृत या अस्वीकृत किया जाता है आवास स्वीकृत के बाद प्रथम किस्त पहुँचने से पहले अधिकृत अधिकारी कर्मचारी स्वीकृत जगह पर आवास का जियो टैग करता है तब लाभार्थी के खाते में आवास बनाने के लिये पैसा भेजा जाता यहाँ फर्जी जाँच पडताल जिओ टैग सीधे पैसा खाते में । इसे भ्रष्टाचार रिश्वतखोरी धोटाला कमीशनखोरी करके योगी आदित्यनाथ सरकार को बदनाम करने का जमकर कार्य किया जा रहा है जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुये हैं । इस भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों कर्मचारियों पर जिला परशासन कार्यवाही करेगा या ऐसे ही भ्रष्टाचार घोटाला कार्य बेरोकटेक चलते रहेंगे और सरकारी धन की लूट करके आधा आधा हिस्सा का खेल करके बंदरबाँट चलता रहेगा । डूडा से स्वीकृत आवासों के लोगों के पहले से निघोना गाँव में ऐसे बने हुये हैं दो मंजिल मकान ।
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