झटपट एवं निवेश मित्र पोर्टल पर जारी नए कनेक्शन मे हजारों उपभोक्ताओं का प्रथम बिल जनरेशन लंबित, सामने आया विद्युत नियामक आयोग द्वारा बनाए गए कानून का बड़ा उल्लंघन उपभोक्ता परिषद ने उठाए गंभीर सवाल।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य श्री अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि झटपट एवं निवेश मित्र पोर्टल पर आवेदन करने के बाद जारी किए गए नए बिजली कनेक्शन जिसमे हजारों उपभोक्ताओं के प्रथम विद्युत बिल जनरेशन में बड़े पैमाने पर लंबितता सामने आई है। अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 तक के आंकड़ों की समीक्षा में यह स्थिति सामने आई है। इसमें सबसे ज्यादा स्मार्ट मीटर विद्युत उपभोक्ता है।
अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच झटपट पोर्टल पर प्रथम बिल जनरेशन के कुल 67,449 प्रकरण लंबित हैं। इनमें पूर्वांचल के 22,277, मध्यांचल के 18,914, पश्चिमांचल के 12,080, दक्षिणांचल के 12,749 तथा “केस्को के 1,429 प्रकरण शामिल हैं।
झटपट पोर्टल पर प्रथम बिल जनरेशन लंबित प्रकरण — डिस्कॉमवार
डिस्कॉम लंबित उपभोक्ता
पूर्वांचल 22,277
मध्यांचल 18,914
पश्चिमांचल 12,080
दक्षिणांचल 12,749
“केस्को 1,429
कुल 67,449
वहीं निवेश मित्र पोर्टल पर प्रथम बिल जनरेशन के कुल 1,840 प्रकरण लंबित हैं। इनमें दक्षिणांचल के 380, कैस्को के 53, मध्यांचल के 362, पश्चिमांचल के 750 तथा पूर्वांचल के 295 प्रकरण शामिल हैं।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यह स्थिति अत्यंत गंभीर है, क्योंकि उपभोक्ता को विद्युत कनेक्शन दिए जाने और RMS पर Ledgerization के बाद निर्धारित समय के भीतर प्रथम विद्युत बिल उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। प्रथम बिल में अत्यधिक विलंब होने से उपभोक्ताओं को एक साथ अधिक अवधि का बिल प्राप्त होने की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा बनाए गए Supply Code, 2005 की धारा 7.7.2 में प्रथम बिल जारी करने में विलंब के संबंध में स्पष्ट प्रावधान है। इसके अनुसार कनेक्शन को ऊर्जा प्रदान किए जाने की तारीख से दो बिलिंग चक्र के अंतर्गत प्रथम बिल जारी नहीं किए जाने पर लाइसेंसी द्वारा विलंब के प्रत्येक बिलिंग चक्र के लिए ₹500 की दर से उपभोक्ता को प्रतिकर देय होगा।
श्री वर्मा ने कहा कि यदि प्रथम बिल छह माह बाद जारी किया जा रहा है तो ऐसे मामलों में नियमानुसार उपभोक्ताओं को देय प्रतिकर की गणना की जानी चाहिए। साथ ही लाइसेंसी द्वारा ऐसे मामलों का क्षेत्रवार विवरण आयोग को त्रैमासिक रूप से उपलब्ध कराया जाना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि झटपट और निवेश मित्र पोर्टल पर इतने बड़े पैमाने पर प्रथम बिल जनरेशन लंबित होना वितरण निगमों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। वितरण निगमों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि 67,449 झटपट तथा 1,840 निवेश मित्र प्रकरणों में प्रथम बिल अब तक क्यों नहीं बनाए गए और इनमें कितने प्रकरण दो बिलिंग चक्र की निर्धारित सीमा पार कर चुके हैं।

