उपभोक्ता परिषद की 2008 में शुरू की गई लड़ाई का सुखद परिणाम, केंद्रीय कोटे से बिजली आवंटन में उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे देश के टॉप फाइव राज्यों का हुआ खुलासा केंद्र किस दे रहा है कितनी बिजली

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 उपभोक्ता परिषद की 2008 में शुरू की गई लड़ाई का सुखद परिणाम, केंद्रीय कोटे से बिजली आवंटन में उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे देश के टॉप फाइव राज्यों का हुआ खुलासा केंद्र किस दे रहा है कितनी बिजली

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा वर्ष 2008 में शुरू की गई एक महत्वपूर्ण लड़ाई का आज सुखद परिणाम सामने आया है। परिषद लगातार यह मांग करता रहा है कि केंद्रीय उत्पादन केंद्रों से राज्यों को बिजली आवंटित करने की व्यवस्था में उत्तर प्रदेश की विशाल आबादी और बड़ी संख्या में बिजली उपभोक्ताओं को उचित महत्व दिया जाए तथा गाडगिल फॉर्मूले में आवश्यक बदलाव किया जाए।


उपभोक्ता परिषद की इस मांग को लेकर वर्ष 2008 में परिषद का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश की ओर से उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने केंद्र सरकार को भेजा गया था। उस समय परिषद ने स्पष्ट रूप से मांग उठाई थी कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य को उसकी आबादी, बिजली उपभोक्ताओं की संख्या और वास्तविक विद्युत आवश्यकता के अनुरूप केंद्रीय क्षेत्र से अधिक बिजली आवंटित की जानी चाहिए।


उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व देश की सर्वोच्च सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा लगभग 18 वर्ष बाद राज्यसभा में 10 अगस्त 2026 को प्रस्तुत आंकड़े इस संघर्ष के सुखद परिणाम के रूप में सामने आए हैं। केंद्रीय उत्पादन केंद्रों (CGS) से बिजली आवंटन के मामले में 30 जून 2026 तक उत्तर प्रदेश को 11,520.5 मेगावाट बिजली आवंटित हुई है, जो दिए गए राज्यवार आंकड़ों में सर्वाधिक है।


उत्तर प्रदेश की लगातार बढ़ती हिस्सेदारी

राज्य 31.03.2025 31.03.2026 30.06.2026

उत्तर प्रदेश 9,530.4 MW 10,881.2 MW 11,520.5 MW

महाराष्ट्र 8,955.2 MW 9,059.8 MW 9,025.2 MW

बिहार 7,572.2 MW 8,557.5 MW 8,559.0 MW

मध्य प्रदेश 7,244.5 MW 7,668.2 MW 7,655.3 MW

गुजरात 7,313.9 MW 7,048.5 MW 6,998.9 MW

आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश को केंद्रीय उत्पादन केंद्रों से मिलने वाला आवंटन 31 मार्च 2025 के 9,530.4 मेगावाट से बढ़कर 31 मार्च 2026 को 10,881.2 मेगावाट और 30 जून 2026 तक 11,520.5 मेगावाट हो गया।


31 मार्च 2025 से 30 जून 2026 के बीच उत्तर प्रदेश के केंद्रीय क्षेत्र के बिजली आवंटन में 1,990.1 मेगावाट की वृद्धि हुई है। वहीं 30 जून 2026 को उत्तर प्रदेश का आवंटन महाराष्ट्र की तुलना में 2,495.3 मेगावाट अधिक रहा।


परिषद की पुरानी मांग, आज बड़ी उपलब्धि

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि वर्ष 2008 में शुरू की गई यह लड़ाई केवल उत्तर प्रदेश के लिए अधिक बिजली लेने की लड़ाई नहीं थी, बल्कि प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के न्यायसंगत अधिकार की लड़ाई थी। परिषद ने लगातार यह मुद्दा उठाया कि केंद्रीय बिजली आवंटन में आबादी और बिजली उपभोक्ताओं की वास्तविक संख्या को अधिक महत्व मिलना चाहिए।


उन्होंने कहा कि “वर्ष 2008 में जिस लड़ाई को उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने शुरू किया था, आज केंद्रीय कोटे से बिजली आवंटन में उत्तर प्रदेश का देश में सबसे आगे पहुंचना उस संघर्ष का सुखद परिणाम है। यह प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी उपलब्धि है।”


परिषद का कहना है कि केंद्रीय क्षेत्र से उत्तर प्रदेश का आवंटन बढ़कर 11,520.5 मेगावाट पहुंचना यह दर्शाता है कि प्रदेश की बढ़ती विद्युत आवश्यकता को केंद्रीय स्तर पर भी पर्याप्त महत्व मिल रहा है। उपभोक्ता परिषद आगे भी उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के हित में केंद्रीय बिजली आवंटन में प्रदेश की हिस्सेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रयासरत रहेगा।

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