बस्ती*अगई भगाड़ में आम के पेड़ों की अवैध कटान मामले में हल्का वन दरोगा ने की लीपापोती*
- हल्का वन दरोगा ने डीएफओ व रेंजर कप्तानगंज के आंखों में धूल झोंककर प्रेषित किया है गलत रिपोर्ट
- एक दर्जन से अधिक आम के हरे पेड़ों की कटान होने के बाद भी जुर्माना मात्र 10 हजार रुपए
- एक प्रतिबंधित पेड़ की कटान पर लगता है 10 हजार रुपए का जुर्माना - रेंजर
*कप्तानगंज बस्ती* - विकासखण्ड बहादुरपुर के अन्तर्गत ग्राम पंचायत अगई भगाड़ में बिना परमिट के दर्जनों आम के पेड़ों की कटान मामले में वन विभाग ने सिर्फ खानापूर्ति की है अर्थात् जांच व कार्यवाही के नाम पर पूरी तरह लीपापोती की है । डीएफओ बस्ती डॉ शिरीन ने खबरों का संज्ञान लेकर कार्रवाई का आदेश दिया था । रेंजर कप्तानगंज राजू प्रसाद ने हल्का वन दरोगा को जांच करके प्रति कटे आम के पेड़ों के हिसाब से कार्रवाई का आदेश दिया था ।
सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायत अगई भगाड़ में बिना परमिट के एक दर्जन से ज्यादा आम के पेड़ों की कटान हुई थी जिसका वीडिओ सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था लेकिन हल्का वन दरोगा ने तेज तर्रार डीएफओ डॉ शिरीन व वन क्षेत्राधिकारी कप्तानगंज राजू प्रसाद के आंख में धूल झोंककर गलत रिपोर्ट प्रेषित कर दिया है । एक दर्जन से अधिक आम पेड़ों की कटान होने पर सिर्फ 10 हजार का जुर्माना लगाना वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है ।
शासनादेश के मुताबिक 01 प्रतिबंधित पेड़ की कटान पर 10 हजार जुर्माना लगता है। एक दर्जन पेड़ों पर जुर्माना ₹1.2 लाख से ज्यादा होना चाहिए था जबकि हल्का वन दरोगा ने जांच एवं कार्यवाही के नाम पर बड़ा खेल कर दिया है । बड़ा सवाल यह है कि एक दर्जन पेड़ कटने पर सिर्फ ₹10 हजार जुर्माना कैसे? क्या हल्का वन दरोगा और नगर पुलिस की मिलीभगत से मामले को दबाया गया? अगर जिम्मेदार अधिकारी दूसरी टीम से पुनः जांच कराएं तो हल्का वन दरोगा के भ्रष्टाचार की पोल खुल सकती है और गाज गिर सकती है। जांच एवं कार्रवाई के नाम पर हुई लीपापोती जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस संम्बंध में डीएफओ ने कहा कि उक्त प्रकरण में मुकदमा दर्ज है जो केस संख्या - 02/ 2006 है जिसमें जुर्माना की राशि 10000 हजार रुपए दर्शाया गया है । यदि हल्का वन दरोगा द्वारा गलत जांच किया गया है तो पुनः जांच कराकर विभागीय कार्यवाही की जायेगी ।

