जालौन एसडीएम IAS रिंकू सिंह राही का तबादला नहीं, बल्कि जनता और ईमानदार शिक्षकों का समर्थन बन रहा कवच...
उरई/जालौन: जालौन के एसडीएम आईएएस रिंकू सिंह राही का नाम इन दिनों पूरे जनपद में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। एक तरफ जहाँ उनकी कार्यशैली ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा रखी है, वहीं दूसरी तरफ उनके कामकाज के तौर-तरीकों ने सत्ता के गलियारों में भी बेचैनी बढ़ा दी है। आलम यह है कि जो जनप्रतिनिधि शहर के मुख्य मार्गों पर लगे डिवाइडरों को व्यवस्थित नहीं करवा पा रहे हैं, वे अब एसडीएम राही को पद से हटाने के लिए लामबंद होते नजर आ रहे हैं। इस मुद्दे ने अब जनपद में एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या ईमानदार अधिकारियों का टिकना अब प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है?
एसडीएम राही की कार्यप्रणाली का सबसे सीधा असर कुठौद और जालौन ब्लॉक के शिक्षा विभाग पर पड़ा है। लंबे समय से एबीएसए (ABSA) के भरोसे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने वाले और मनमानी करने वाले शिक्षकों में इस समय डर और हड़कंप का माहौल है। जानकारों का कहना है कि उनकी बेचैनी ही इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि एसडीएम राही का प्रशासनिक नियंत्रण और व्यवस्था दुरुस्त है। जो शिक्षक अपनी ड्यूटी ईमानदारी से निभा रहे हैं, उनमें इस कार्यवाही को लेकर भारी उत्साह है और वे एसडीएम की सख्ती का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। उनके समर्थकों का साफ कहना है कि जो लोग जिम्मेदारी से भागते हैं और जो वाकई 'चोर' की श्रेणी में आते हैं, केवल वही इस व्यवस्था से परेशान हैं।
सोशल मीडिया से लेकर आम जनता के बीच अब यह मांग जोर पकड़ने लगी है कि रिंकू सिंह राही जैसे ईमानदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पूरे देश के लिए एक नजीर बननी चाहिए। जनपद के जागरूक नागरिकों और ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाने वाले शिक्षकों का मानना है कि राही को किसी भी राजनीतिक दबाव में हटाना जनहित के विरुद्ध होगा। जहाँ एक तरफ कुछ प्रभावशाली लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए उनके तबादले की पटकथा लिख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता और ईमानदार तबका उनके साथ चट्टान की तरह खड़ा नजर आ रहा है। फिलहाल, जालौन में यह प्रशासनिक उठापटक एक बड़ी बहस में तब्दील हो गई है कि क्या प्रशासन व्यवस्था सुधारने वालों को फलने-फूलने देगा या फिर चंद लोगों की नाराजगी पर ईमानदार अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जाएगा।
क्या आपको लगता है कि प्रशासन में व्यवस्था सुधारने के लिए रिंकू सिंह राही जैसी सख्ती का होना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है?

