GST #इतिहास की अनोखी रिकवरी! पुलिस के खौफ से 5 बड़े #कारोबारियों ने सरेंडर किए ₹10.78 करोड़

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 ***** GST #इतिहास की अनोखी रिकवरी! पुलिस के खौफ से 5 बड़े #कारोबारियों ने सरेंडर किए ₹10.78 करोड़ *****


मुंबई और हैदराबाद के पांच #व्यापारियों ने बोगस फर्मों के जरिए 10.78 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट हड़पा था। पुलिस के शिकंजे और हाईकोर्ट से स्टे न मिलने पर उन्होंने यह रकम सरकार को वापस कर दी, हालांकि #गिरफ्तारी अभी बाकी है।


#शाहजहांपुर। बोगस फर्में बनाकर 10.78 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) हड़पने वाले मुंबई व हैदराबाद के पांच व्यापारियों पर शिकंजा कसा तो गिरफ्तारी से बचने के लिए पूरी रकम सरकार को रकम लौटा दी। हालांकि इसके बाद भी इन्हें राहत नहीं मिलेगी। #गिरफ्तारी के लिए जल्द ही टीमें संबंधित स्थानों पर भेजी जाएंगी। जिले में यह पहला मामला है, जब जीएसटी चोरी में इतनी बड़ी रकम सरकार को वापस हुई है।


वर्ष 2025 में मुंबई के सिद्धि विनायक, राज ट्रेडर्स, गुरु ट्रेडर्स व सर्व साल्यूशन फर्मों ने #विभिन्न फर्मों से 45 करोड़ 40 लाख रुपये का स्पेयर पार्ट्स का व्यापार दर्शाया था। इनके बिल लगाकर 10 करोड़ 78 लाख का आइटीसी लाभ ले लिया था।


जब जांच हुई तो पता चला कि इन फर्मों ने जिन #फर्मों से माल लिया और बेचा वे सभी बोगस थीं, उनका विभाग में पंजीकरण तो था, लेकिन दिए गए पतों पर इन नाम से कोई फर्म या कंपनी #संचालित नहीं मिली। बिना कोई व्यापार किए चारों फर्म संचालकों ने आइटीसी हड़पने के लिए बोगस फर्मों के फर्जी बिल लगाए थे।


गैंगस्टर सेल प्रभारी वीरेंद्र सिंह की जांच में फर्म संचालक के रूप में मुंबई निवासी अनमोल सेठी, चरनजीत गुजराल, विमल पमील शाह व सत्यपाल सिंह व #हैदराबाद के राकेश गर्ग के नाम सामने आए। इन सभी की #गिरफ्तारी के लिए मुंबई पुलिस से संपर्क किया तो आरोपितों ने महाराष्ट्र हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर कर दी।


मगर राहत नहीं मिल सकी। पुलिस ने शिकंजा कसा तो आरोपितों ने आइटीसी के रूप में चोरी की गई पूरी रकम राज्य कर विभाग को वापस कर दी। वीरेंद्र सिंह ने बताया कि मुंबई पुलिस के माध्यम से रुपये जमा कराए जाने की रिपोर्ट मिली है।


उन्होंने बताया कि इस संबंध में राज्य कर #विभाग के अधिकारियों से भी बात की जा रही है। आरोपितों को स्टे नहीं मिला है इसलिए उनकी गिरफ्तारी के संबंध में डीआइजी बरेली के कार्यालय से अनुमति मिलते ही टीमें रवाना कर दी जाएगी।


#यह है पूरा मामला

रोजा की लोक विहार कालोनी में मई 2025 में सिंह #इंटरप्राइजेज नाम से बोगस फर्म पकड़ी गई थी। इटावा निवासी छात्र मंदीप सिह के नाम पर बनी इस फर्म को लेकर जांच हुई तो बड़ी संख्या में अन्य फर्मों व इनके माध्यम से आइटीसी चोरी की जानकारी सामने आई।


पांच दिसंबर 2025 को रोजा पुलिस ने इस प्रकरण में गिरोह के #सरगना दिल्ली निवासी गौरव यादव, दीपक व सिद्धार्थ पांडेय को गिरफ्तार किया था। तीनों लोग इंटरनेट मीडिया पर नौकरी के विज्ञापन निकालकर #बेरोजगारों के अभिलेख हासिल करते और उन्हीं अभिलेखों से बोगस फर्म बना देते थे।


इनसे पूछताछ में गाजियाबाद निवासी यस बैंक के #शाखा प्रबंधक संजीव गुप्ता व अमेठी निवासी वरुण शर्मा के नाम सामने आए थे। संजीव को ये लोग बोगस फर्म बेचते थे और वह इन्हें मुंबई निवासी चरनजीत, अनमोल आदि को बेचता था। इसमें उसे आर्थिक लाभ होता था। संजीव व वरुण भी जनवरी में #गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

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