होम्योपैथी के नाम पर अंग्रेजी दवा का खेल, सिस्टम फेल

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होम्योपैथी के नाम पर अंग्रेजी दवा का खेल, सिस्टम फेल

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शुगर जड़ से खत्म करने के दावे पर उठे गंभीर सवाल

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मरीजों में किडनी खराब होने और हाइपोग्लाइसीमिया के आरोप

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डिग्री, दवाओं और स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर चर्चा तेज

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शाहजहाँपुर। थाना कोतवाली क्षेत्र स्थित हनुमत धाम में संचालित एक आयुर्वेदिक केंद्र इन दिनों चर्चाओं में है। केंद्र से जुड़े एक तथाकथित वैद्य पर मधुमेह (शुगर) को जड़ से खत्म करने का दावा करने और चूर्ण की पुड़ियों में अंग्रेजी दवा मिलाकर मरीजों को देने के आरोप लगे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आई शिकायतों और मरीजों के अनुभवों के बाद पूरे मामले को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों के अनुसार मधुमेह एक दीर्घकालिक (क्रॉनिक) बीमारी है, जिसे नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से इसे हमेशा के लिए समाप्त कर देने का कोई प्रमाण नहीं है। ऐसे में शुगर जड़ से खत्म करने के दावों को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञ भी सवाल उठा रहे हैं। सोशल मीडिया पर स्वयं को एमबीबीएस चिकित्सक बताने वाले एक यूजर ने पोस्ट साझा कर दावा किया कि उनके पास लगातार ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जो हनुमत धाम स्थित केंद्र से चूर्ण की पुड़ियां लेकर सेवन कर रहे हैं। पोस्ट में आरोप लगाया गया कि कई मरीजों में Serum Creatinine का स्तर बढ़ा मिला और कुछ की किडनी की स्थिति भी गंभीर पाई गई। पोस्ट के अनुसार, मरीजों ने बताया कि केंद्र पर उन्हें यह भरोसा दिलाया जाता है कि कुछ महीनों अथवा वर्षों में उनकी शुगर पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। वहीं, कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि चूर्ण में 2 एमजी की Glimepiride गोलियां पीसकर मिलाई जाती हैं। कई बार पुड़ियों में गोली के अधूरे टुकड़े भी दिखाई देने की बात कही गई।विशेषज्ञों के मुताबिक Glimepiride मधुमेह नियंत्रित करने की एलोपैथिक दवा है। यदि इसे बिना चिकित्सकीय निगरानी और तय मात्रा के सेवन कराया जाए तो मरीज गंभीर Hypoglycemia का शिकार हो सकता है। इससे बेहोशी, अत्यधिक कमजोरी, हृदय संबंधी खतरे और अन्य जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।कुछ मरीजों ने यह भी आरोप लगाया कि चूर्ण खाने के बाद जब शुगर अचानक कम हो जाती थी, तब उन्हें रसगुल्ला या गुलाब जामुन खाने की सलाह दी जाती थी। बाद में शुगर सामान्य होने पर इसे इलाज के असर के रूप में प्रस्तुत किया जाता था। सूत्रों का यह भी दावा है कि संबंधित वैद्य की डिग्रियों को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। बावजूद इसके अब तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा यह भी है कि अपने ऊपर लग रहे आरोपों से बचाव के लिए संबंधित व्यक्ति ने स्थानीय मीडिया से निकटता बढ़ा ली है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की जांच कर कोई कार्रवाई करता है या फिर शुगर खत्म करने के दावे यूं ही मरीजों के बीच चलते रहेंगे।


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