बिजनौर (उत्तर प्रदेश) में ट्रैक्टर फाइनेंस के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है

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 बिजनौर (उत्तर प्रदेश) में ट्रैक्टर फाइनेंस के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस गिरोह ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे विभिन्न फाइनेंस कंपनियों से करोड़ों रुपये के ट्रैक्टर लोन पर लिए और फिर उन्हें अवैध तरीके से बेचकर कंपनियों को भारी चूना लगाया।


यहाँ इस मामले की पूरी अपडेट दी गई है:

मुख्य घटनाक्रम: धोखाधड़ी का तरीका

पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह एक सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था:



फर्जी आईडी का उपयोग: गिरोह के सदस्य गरीब ग्रामीणों या भोले-भाले लोगों के नाम पर फर्जी आधार कार्ड और दस्तावेज तैयार करते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर वे फाइनेंस कंपनियों से ट्रैक्टर किस्तों पर निकलवाते थे।


दस्तावेजों में हेराफेरी: ट्रैक्टर मिलने के तुरंत बाद, ये लोग उसका फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) तैयार कर लेते थे ताकि उसे दोबारा बेचा जा सके


सस्ते दामों में बिक्री: इन ट्रैक्टरों को बिजनौर से बाहर, खासकर दूसरे राज्यों या दूर-दराज के इलाकों में 'बिना लोन वाले' वाहन बताकर बेच दिया जाता था।


झूठी चोरी की रिपोर्ट: कई मामलों में गिरोह ने ट्रैक्टर बेच देने के बाद पुलिस में उसकी चोरी की फर्जी FIR दर्ज कराई, ताकि इंश्योरेंस का पैसा भी हड़पा जा सके और बैंक को भुगतान न करना पड़े।


पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां

बिजनौर पुलिस ने इस मामले में सक्रियता दिखाते हुए निम्नलिखित सफलताएं हासिल की हैं:


गिरोह का पर्दाफाश: स्थानीय पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने मुखबिर की सूचना पर छापेमारी कर गिरोह के मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है।


वाहनों की बरामदगी: पुलिस ने छापेमारी के दौरान कई ट्रैक्टर बरामद किए हैं, जिनकी चेसिस और इंजन नंबरों से छेड़छाड़ की गई थी।


अंतर्राज्यीय कनेक्शन: जांच में पता चला है कि इस गिरोह के तार उत्तराखंड, हरियाणा और राजस्थान से भी जुड़े हुए हैं, जहाँ ये चोरी के या फाइनेंस के ट्रैक्टर खपाते थे।


आम जनता के लिए चेतावनी

पुलिस प्रशासन ने ट्रैक्टर खरीदने वालों के लिए एडवाइजरी जारी की है:


पुराना ट्रैक्टर खरीदते समय केवल RC पर भरोसा न करें।

संबंधित फाइनेंस कंपनी से NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) की जांच जरूर करें।

इंजन और चेसिस नंबर को सरकारी पोर्टल (Vahan) पर क्रॉस-वेरिफाई करें।


ताजा स्थिति: पुलिस अब उन शोरूम और बैंक कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है जिन्होंने बिना सही सत्यापन के इतनी बड़ी संख्या में लोन पास किए। पकड़े गए आरोपियों पर धोखाधड़ी (420), कूटरचित दस्तावेज बनाने (467/468) और चोरी का माल रखने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

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