“350 वोटों से हारने वाला नेता… आखिर कैसे बना जनता का सबसे भरोसेमंद चेहरा?”
1992 में पहली बार पुवायां विधानसभा का चुनाव लड़ा… हार मिली, लेकिन हौसला नहीं टूटा।
लोगों ने सोचा राजनीति खत्म हो जाएगी… लेकिन यहीं से शुरू हुआ असली संघर्ष।
फिर आया साल 2005…
वार्ड नं. 3 से ऐसा चुनाव जीते कि पूरे बरेली मंडल में सबसे ज्यादा वोट पाने वालों में नाम दर्ज हो गया।
10900 मतों की ऐतिहासिक जीत ने सबको चौंका दिया।
कहते हैं उस जीत की गूंज लखनऊ तक पहुंची…
तभी ने खुद बुलाकर सम्मानित किया था।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई…
जनता ने विकास कार्य देखे… सड़कें, क्षेत्र की समस्याएं और लोगों के बीच लगातार मौजूदगी देखी…
और 2015 में फिर दूसरी बार जिला पंचायत सदस्य बनाकर अपना भरोसा जता दिया।
आज जब राजनीति में लोग पार्टी बदलते नजर आते हैं…
तब रूपराम कबाड़ी नेता की पहचान एक ऐसे समाजवादी नेता की है, जिसने कभी विचारधारा नहीं छोड़ी।
दोनों बार समाजवादी पार्टी के साथ खड़े रहे…
न गद्दारी की… न रास्ता बदला।
शायद यही वजह है कि आज भी कार्यकर्ता उन्हें “सच्चा समाजवादी सिपाही” कहकर याद करते हैं…

