***** आसाराम के #सहयोगियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे #दुष्कर्म पीड़ित के पिता, शरतचंद्र और शिल्पी के बरी होने से निराश *****
#दुष्कर्म पीड़िता के पिता आसाराम की उम्रकैद बरकरार रखने के फैसले से संतुष्ट हैं, लेकिन सह-अभियुक्त शरतचंद्र और शिल्पी को बरी किए जाने से निराश हैं। उन्होंने कहा कि शरत और शिल्पी ने षड्यंत्र रचा था और वे न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।
#शाहजहांपुर। दुष्कर्मी आसाराम को उम्रकैद बरकरार रखे जाने पर पीड़िता ने संतोष जताया मगर, सह अभियुक्त शरतचंद्र व शिल्पी के बरी किए जाने से निराश हैं। गुरुवार को उन्होंने दोहराया कि इन दोनों ने षड्यंत्र रचकर आसाराम की कुटिया में धकेल दिया था, इन्हें छोड़ेंगे नहीं।
#न्याय पाने के लिए 16 वर्ष से बिटिया के साथ डटकर खड़े पिता ने इस निर्णय में भी सहमति जताई। उन्होंने कहा कि शरतचंद्र व शिल्पी के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।
#वर्ष 2013 में शाहजहांपुर निवासी नाबालिग पीड़िता एवं उनका भाई आसाराम के छिंदवाड़ा (राजस्थान) स्थित गुरुकुल में पढ़ते थे। छात्रा को जोधपुर के मणई स्थित आश्रम में बुलाकर दुष्कर्म किया गया था। 21 अप्रैल 2013 को जोधपुर में आसाराम के विरुद्ध मुकदमा हुआ, चार महीने बाद उसे जेल भेजा गया। 25 अप्रैल 2018 को जिला एवं सत्र न्यायालय ने उसे उम्रकैद एवं सह अभियुक्त शिल्पी व शरतचंद्र को 20-20 वर्ष कारावास की सजा सुनाई थी।
#हाईकोर्ट में की थी अपील
इसके विरुद्ध आसाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट में अपील की थी, जिस पर बुधवार को निर्णय आया। कोर्ट ने आसाराम की सजा बरकरार रखने, अंतरित जमानत से सरेंडर एवं शरतचंद्र व शिल्पी को बरी करने का आदेश दिया। गुरुवार को पीड़िता के पिता ने घटनाक्रम में शरत व शिल्पी की भूमिका बताई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में छिंदवाड़ा गुरुकुल की वार्डेन शिल्पी और डायरेक्टर शरतचंद्र था।
#शिल्पी ने फोन किया कि 'आपकी बेटी पर भूत-प्रेत का साया है, इसे बापू (आसाराम) के पास ले चलना होगा, वह अनुष्ठान करेंगे।' यही बात शरतचंद्र ने दोहराई। इन दोनों के बातों में आकर बेटी के साथ आसाराम के आश्रम पहुंचे। वहां शिल्पी उनकी बेटी को लेकर आसाराम की कुटिया में लेकर गई। उन्हें नहीं पता था कि कुटिया के अंदर दूसरा गेट भी है, शिल्पी बेटी को लेकर उस रास्ते से दूसरी कुटिया में निकल गई थी।
इसी घटनाक्रम के आधार पर इन दोनों को भी जोधपुर कोर्ट ने सजा दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ माह पहले अंतरिम जमानत पर आए आसाराम ने साक्ष्यों में हेराफेरी कराई, जिसका लाभ #शरतचंद्र व शिल्पी को मिला। बिटिया ने उनसे कहा कि शिल्पी व शरतचंद्र राक्षस हैं। इन्हें सजा जरूर मिलनी चाहिए। अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
Dainik Jagran

