दिसंबर 2024 में कर्मचारियों ने जताई थी आशंका, अब ₹121 करोड़ में निजी कंपनी को बेच दी गई IMPCL
देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड स्थित सरकारी आयुर्वेदिक एवं यूनानी औषधि निर्माता कंपनी Indian Medicines Pharmaceutical Corporation Limited (IMPCL) के निजीकरण की प्रक्रिया आखिरकार पूरी हो गई है। केंद्र सरकार ने 26 मई 2026 को IMPCL की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी और प्रबंधन नियंत्रण को निजी कंपनी Skymap Pharmaceuticals Pvt. Ltd. को लगभग 121 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी दे दी।
यह वही कंपनी है, जिसके कर्मचारियों ने दिसंबर 2024 में कांग्रेस नेता Rahul Gandhi से मुलाकात कर आरोप लगाया था कि सरकार लाभकारी सार्वजनिक उपक्रम को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। उस समय कर्मचारियों ने कंपनी के भविष्य और रोजगार सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, रणनीतिक विनिवेश प्रक्रिया के तहत प्राप्त बोलियों में Skymap Pharmaceuticals की ₹121.00 करोड़ से अधिक की बोली सबसे ऊंची रही, जिसे मंजूरी दे दी गई। इस सौदे में कंपनी की पूरी हिस्सेदारी के साथ प्रबंधन नियंत्रण का हस्तांतरण भी शामिल है।
IMPCL की स्थापना वर्ष 1978 में की गई थी और यह आयुष मंत्रालय के अधीन कार्यरत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी रही है। कंपनी आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं के निर्माण एवं आपूर्ति का कार्य करती है तथा इसका प्रमुख उत्पादन केंद्र उत्तराखंड के अल्मोड़ा में स्थित है।
केंद्र सरकार ने IMPCL के रणनीतिक विनिवेश को वर्ष 2017 में ही सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद कई चरणों में प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। अब बिक्री को अंतिम स्वीकृति मिलने के साथ ही कंपनी के निजीकरण का रास्ता साफ हो गया है।

