गाजियाबाद में नकली काली मिर्च का बड़ा भंडाफोड़: मैदा, गोंद और रिफाइंड तेल से बना रहे थे 'काली मिर्च', लाखों का माल जब्त
गाजियाबाद/शाहजहांपुर:
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (लोनी बॉर्डर) में खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र के केहर फार्म हाउस (सेवाधाम, बेहटा, हाजीपुर) में चल रही एक ऐसी फैक्ट्री पर छापा मारा गया, जहाँ बेहद घटिया और रद्दी काली मिर्च को मैदा, गोंद और रिफाइंड सोयाबीन तेल की मदद से 'चमकदार A-ग्रेड' काली मिर्च में बदला जा रहा था।
छापेमारी में मिली लाखों की नकली काली मिर्च
कार्रवाई के दौरान टीम को मौके से लाखों रुपये की सामग्री बरामद हुई, जिसकी कुल कीमत 13 लाख 34 हजार रुपये आंकी गई है:
3,000 किलो मैदा
900 किलो गोंद
1,200 किलो छोटे दानों वाली कच्ची काली मिर्च
975 किलो तैयार (चमकदार) नकली काली मिर्च
37 टिन रिफाइंड सोयाबीन तेल (चमक के लिए प्रयुक्त)
जलालाबाद से दिल्ली-एनसीआर तक फैला 'नकली' खाद्य पदार्थ बनाने का नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि इस काले कारोबार के तार शाहजहांपुर जनपद के जलालाबाद से जुड़े हैं। आरोपी लोकेश गुप्ता (वर्तमान निवासी बुद्ध विहार, दिल्ली) मूल रूप से जलालाबाद का रहने वाला है।
सूत्रों और स्थानीय दावों के अनुसार, जलालाबाद से आए कई लोग शुरुआत में दूसरों के गोदामों में काम करते थे। इसके बाद खुद के गोदाम खोलकर जीरा, पोस्ता दाना और काली मिर्च जैसे मसालों में मिलावट का धंधा शुरू किया और आज दिल्ली-गाजियाबाद में अरबपति बन चुके हैं। लोनी, गाजियाबाद और दिल्ली के कई इलाकों में जलालाबाद के लोगों द्वारा संचालित ऐसे कई संदिग्ध गोदामों का नेटवर्क सक्रिय है।
खाद्य सुरक्षा विभाग का बयान:
"बरामद सामग्री के नमूने सील कर लैब जांच के लिए भेज दिए गए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन और पुलिस की टीम मिलकर इस गिरोह से जुड़े अन्य गोदामों और विक्रेताओं की तलाश में जुटी है।"

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