11 हजार वोल्ट की टूटी लाइन पानी में, हादसे के इंतजार में बिजली विभाग?
शाहजहांपुर शहर में बिजली विभाग की लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जो किसी बड़े हादसे को दावत देता नजर आ रहा है। त्रिलोकीनाथ मंदिर के पास हाईवे किनारे 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन के तार टूटकर पानी में पड़े हैं, वहीं बिजली के खंभे भी क्षतिग्रस्त होकर जमीन पर गिरे दिखाई दे रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि यह स्थान लोगों की आवाजाही वाले रास्ते के किनारे है।
कंटाप न्यूज़ की टीम जब मौके पर पहुंची तो तस्वीरें बेहद चिंताजनक थीं। पानी से भरे स्थान पर बिजली के तार और टूटे हुए खंभे पड़े नजर आए। इसी रास्ते से राहगीरों और वाहन चालकों की आवाजाही होती है। आसपास रहने वाले लोगों और यहां से गुजरने वालों के लिए यह स्थिति कभी भी खतरे का कारण बन सकती है।
पानी में पड़ी हाईटेंशन लाइन ने बढ़ाई चिंता
11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन का पानी के संपर्क में होना अपने आप में गंभीर सुरक्षा का विषय है। मौके पर मौजूद हालात को देखकर सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या संबंधित विभाग को इस टूटे हुए विद्युत ढांचे की जानकारी है? अगर जानकारी है तो अब तक मौके पर सुरक्षा घेरा क्यों नहीं बनाया गया और रास्ते को सुरक्षित क्यों नहीं कराया गया?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां से लगातार लोगों का आवागमन होता है। इतना ही नहीं, आसपास पानी में गोवंश के आने-जाने की भी स्थिति बताई जा रही है। ऐसे में यदि बिजली आपूर्ति चालू हो या किसी कारण से तार में करंट प्रवाहित हो जाए, तो स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है।
अधिकारियों ओर जनप्रतिनिधियों की नजर से दूर क्यों?
हैरानी की बात यह भी है कि यह कोई सुनसान इलाका नहीं है। आसपास से लगातार वाहन गुजरते हैं और बताया जा रहा है कि कुछ ही दूरी पर 134 पुवायां विधानसभा क्षेत्र के विधायक चेतराम का आवास भी है इसके बावजूद इतने संवेदनशील मामले पर अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही है,
यह सवाल स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
सवाल सिर्फ बिजली का नहीं, लोगों की सुरक्षा का है
बिजली विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ बिजली पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षतिग्रस्त विद्युत लाइनों और खंभों से उत्पन्न खतरे को समय रहते खत्म करना भी उतना ही जरूरी है।
यदि किसी सार्वजनिक रास्ते के किनारे हाईटेंशन लाइन टूटकर पानी में पड़ी हो और उसे तत्काल सुरक्षित न कराया जाए, तो यह गंभीर लापरवाही का मामला बन सकता है।
हालांकि पूरे मामले में बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष भी बेहद महत्वपूर्ण है। विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि लाइन कब टूटी, इसकी सूचना विभाग को कब मिली, मौके पर अब तक क्या कार्रवाई की गई और विद्युत आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए क्या कदम उठाए गए।
बड़ा सवाल—हादसा होने के बाद जागेगा विभाग?
शहर में बेहतर सुविधाओं और सुरक्षित व्यवस्था के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर अगर 11 हजार वोल्ट की लाइन पानी में पड़ी दिखाई दे और उसके आसपास लोगों की आवाजाही बनी रहे
, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या बिजली विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
क्या किसी की जान जाने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी?
या फिर इससे पहले ही इस खतरनाक स्थिति को सुरक्षित कराया जाएगा?
फिलहाल स्थानीय लोगों की मांग है कि बिजली विभाग तत्काल मौके पर पहुंचे,
विद्युत लाइन को सुरक्षित करे, टूटे खंभों को हटवाए और पूरे क्षेत्र की जांच कराकर किसी भी संभावित हादसे को रोके।
कंटाप न्यूज़ की टीम जनता से जुड़े ऐसे ही जमीनी मुद्दों को सामने लाती रहेगी।
अब देखना यह है कि खबर सामने आने के बाद बिजली विभाग कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और इस खतरनाक स्थिति को कब तक दुरुस्त कराया जाता है
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