जनता के गुस्से के आगे झुकी योगी सरकार: प्रीपेड मीटर पर U-टर्न के बाद अब ऊर्जा मंत्री का विभाग बदलने की तैयारी, संघ-भाजपा नेताओं ने दी थी चेतावनी
.स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर उत्तर प्रदेश सरकार का U-टर्न सिर्फ एक फैसला नहीं था, बल्कि यह जनता के प्रचंड गुस्से की जीत थी। प्रदेशभर में बिजली उपभोक्ताओं के विरोध प्रदर्शन इतने बढ़ गए थे कि सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। अब इस मामले के बाद ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का विभाग बदले जाने की तैयारी है।
कैसे फूटा जनता का गुस्सा?
प्रीपेड मीटर को लेकर लोगों का गुस्सा तब भड़का, जब बिजली विभाग ने एक साथ 5 लाख से अधिक घरों की बिजली निगेटिव बैलेंस बताकर काट दी। रिचार्ज करवाने के बाद भी सप्लाई चालू नहीं हुई। विभाग ने इसे 'तकनीकी दिक्कत' बताया, लेकिन लोग सड़कों पर उतर चुके थे।
कोई चेहरा नहीं था, फिर भी था आंदोलन
खास बात यह रही कि इस आंदोलन का कोई चेहरा नहीं था। विपक्षी दल जहां इस मुद्दे को नहीं भांप पाए, वहीं:
-मीडिल क्लास की महिलाएं मीटर उखाड़कर बिजली विभाग के बाहर प्रदर्शन करने लगीं।
- लखनऊ, आगरा, फिरोजाबाद, वाराणसी, प्रयागराज, हापुड़, बरेली, मथुरा समेत कई शहरों में विरोध तेज हो गया।
- वायरल वीडियो ने मामले को और हवा दे दी।
संघ और भाजपा नेताओं ने दी चेतावनी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा नेताओं ने सरकार को साफ संकेत दे दिया था:यदि प्रीपेड मीटर पर फैसला वापस नहीं लिया गया, तो विधानसभा चुनाव में भारी नुकसान हो सकता है।" आगरा, अलीगढ़, फिरोजाबाद जैसे जिलों के भाजपा नेताओं ने स्पष्ट कर दिया था कि यह मुद्दा एंटी-इनकंबेंसी की बड़ी वजह बन सकता है।
सरकार ने शुरू में लगाई अफसरों की बात
सूत्रों के अनुसार, बड़े पैमाने पर विरोध के बावजूद सरकार शुरू में अपना फैसला वापस नहीं लेना चाहती थी। अफसरों ने सरकार को समझाया था कि:"कुछ लोगों के बहकावे में आकर लोग विरोध कर रहे हैं।"लेकिन जब आंदोलन ने जोर पकड़ा, तो सीएम योगी आदित्यनाथ को मजबूरन एक्सपर्ट कमेटी बनानी पड़ी।
प्रदेश में करीब 3.58 करोड़ घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं। फरवरी 2026 तक:
- 87 लाख घरों में स्मार्ट मीटर लग चुके थे।
- इनमें से 82 लाख पोस्टपेड मीटर थे।
- जनवरी से इन्हें प्रीपेड मीटर में बदला जाने लगा।
- मार्च-अप्रैल से बकाए पर कनेक्शन काटने का सिलसिला शुरू हुआ।
अब ऊर्जा मंत्री का विभाग बदलेगा?
संघ और भाजपा के हाई-लेवल सूत्रों का दावा है कि जल्द होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में:
- ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का विभाग बदला जा सकता है।
- उनकी जगह किसी और को ऊर्जा विभाग की कमान दी जा सकती है।
भाजपा नेताओं ने क्यों उठाई आवाज?
भाजपा संगठन तक लगातार एके शर्मा के खिलाफ निगेटिव फीडबैक पहुंच रहा था। विधायकों और जिला नेताओं ने साफ कर दिया था कि यह मुद्दा चुनाव में भारी पड़ सकता है।
विपक्ष चूका, जनता ने खुद संभाली कमान
सपा सहित अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे को भांप नहीं पाए और न ही इसे सियासी जमीन दे पाए। नतीजा यह हुआ कि जनता को खुद ही एकजुट होकर विरोध करना पड़ा।
-प्रीपेड मीटर का फैसला तो वापस ले लिया गया, लेकिन जनता का गुस्सा अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।
- मंत्रिमंडल विस्तार पर सबकी नजरें होंगी।
- किसी और को ऊर्जा विभाग मिलता है, तो यह संकेत होगा कि पार्टी ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।
सीख: जनता की आवाज सबसे बड़ी होती है
इस पूरे मामले ने साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज से बड़ा कुछ नहीं होता। जब सरकार और विपक्ष दोनों चूक गए, तो आम आदमी ने खुद ही सड़कों पर आकर अपनी बात रखी और अपना हक मांगा। और सरकार को झुकना ही पड़ा।#News #AgraMirror #UttarPradesh #PrepaidMeter #YogiAdityanath #AKSharma #EnergyMinister #PublicProtest #BJPCabinet #VidhansabhaElection #AgraNews #agramirrornews #BreakingNews

