गुप्ता जी की विदाई से थमा वसूली का दिव्य खेल, क्या श्रीवास्तव जी साफ कर पाएंगे बेसिक शिक्षा का दलदल?
शाहजहांपुर। जनपद के बेसिक शिक्षा विभाग में लंबे समय से चल रहा वसूली का दिव्य अध्याय आखिरकार समाप्त हो गया। गुरुजी को भगवान मानने वाले इस देश में शाहजहांपुर का बेसिक शिक्षा कार्यालय शिक्षकों के लिए शोषण का वो टॉर्चर रूम बन चुका था, जहां बिना चढ़ावे के कदम रखना भी गुनाह माना जाता था। लेकिन अब कई घोटालों की गूंज लखनऊ तक पहुंचने के बाद तत्कालीन बीएसए दिव्या गुप्ता को हटा दिया गया है और उनकी जगह जयशंकर श्रीवास्तव को शाहजहांपुर का नया बेसिक शिक्षा अधिकारी बनाया गया है। इस फेरबदल के बाद त्रस्त शिक्षकों में उम्मीद की नई किरण जागी है, तो वहीं कार्यालय में बैठे वसूली भाई खंड शिक्षा अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं।
शाहजहांपुर का बेसिक शिक्षा कार्यालय पिछले कुछ समय से एंटी करप्शन टीम का पसंदीदा पिकनिक स्पॉट बन चुका था। बीते दिनों इस कार्यालय के कई बाबुओं और कर्मचारियों को विजिलेंस और एंटी करप्शन की टीम ने रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा। लेकिन मजाल है कि ऊपर बैठी व्यवस्था पर कोई असर पड़ा हो।
आरोप हैं कि दिव्या गुप्ता ने अपने अधीनस्थों और कुछ चुनिंदा खंड शिक्षा अधिकारियों की मदद से ऐसा सिंडिकेट तैयार कर रखा था, जिसका काम सिर्फ और सिर्फ शिक्षकों की चमड़ी उधेड़ना था। मेडिकल लीव हो, एरियर का भुगतान हो, या फिर ट्रांसफर-पोस्टिंग का खेल—हर फाइल का एक तय रेट कार्ड था। जो शिक्षक नौनिहालों का भविष्य संवारने के लिए स्कूल जाता था, उसे इस दफ्तर के चक्कर काट-काटकर अपनी ही तनख्वाह बचाने के लिए चढ़ावा देना पड़ता था।
जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो ईमानदार छवि के जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच बैठा दी थी। हालांकि, जब तक दिव्या गुप्ता अपनी कुर्सी पर जमी हुई थीं, तब तक जांच की फाइलें कछुए की रफ्तार से रेंग रही थीं क्योंकि सबूतों पर कुंडली मारकर बैठने वाले अंदर ही बैठे थे।
अब जब मैडम की विदाई हो चुकी है, तो कयास लगाए जा रहे हैं कि जिलाधिकारी की जांच में बुलेट ट्रेन की रफ्तार आएगी। चर्चा तो यह भी है कि अगर जांच निष्पक्ष और गहराई से हुई, तो दिव्या गुप्ता के कार्यकाल के ऐसे-ऐसे दिव्य और भव्य घोटाले सामने आएंगे कि सुनने वालों के पैरों तले जमीन खिसक जाएगी।
यह पूरा खेल अकेले किसी एक अफसर के बूते का नहीं था। मैडम के इस वसूली साम्राज्य को ब्लॉक स्तर पर संभालने वाले कई खंड शिक्षा अधिकारी आज भी चैन की बंशी बजा रहे हैं। लेकिन जानकारों की मानें तो इन छोटे साहबों की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। शिक्षकों का शोषण करने वाले ये बीईओ अब नए साहब की कार्यशैली को भांपने में जुटे हैं। अगर विभागीय जांच ने सही दिशा पकड़ी, तो कई ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारियों का बोरिया-बिस्तर बंधना तय है।
नए बीएसए जयशंकर श्रीवास्तव के सामने यह जिला किसी कांटों के ताज से कम नहीं है। शाहजहांपुर के बेसिक शिक्षा विभाग की छवि इस समय भ्रष्टाचार के उस गहरे दलदल जैसी है, जिसे साफ करने के लिए कड़े फैसलों की जरूरत है। पीड़ित शिक्षकों को उम्मीद है कि नए साहब आते ही सबसे पहले उस दलालों और भ्रष्ट बाबुओं के सिंडिकेट को ध्वस्त करेंगे, जिसने इस पवित्र विभाग को बदनाम कर रखा है।
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