जनसहयोग से फिर शुरू हुआ भैंसी नदी पुनर्जीवन अभियान, 15 दिन में दूसरी धारा की खुदाई का लक्ष्य
शाहजहांपुर : जिले में भैंसी नदी को पुनर्जीवित करने की दिशा में प्रशासन ने एक बार फिर बड़ा अभियान शुरू किया है। शुक्रवार को जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने विकासखंड बंडा की ग्राम पंचायत नवादा ढाह से दलेलापुर जलधारा तक पूजा-अर्चना कर भैंसी नदी पुनर्जीवन अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी उत्कर्ष द्विवेदी और अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार सिंह भी मौजूद रहे। डीएम ने कहा कि नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन में तालाब, पोखर और अन्य जलस्रोतों की अहम भूमिका होती है। वर्षा के अतिरिक्त जल को संरक्षित कर ये जलस्रोत बाढ़ नियंत्रण में मददगार साबित होते हैं। उन्होंने बताया कि शासन की “एक जनपद-एक नदी” योजना के तहत जिले में भैंसी नदी को पुनर्जीवित करने का कार्य लगातार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष ग्रामीणों, सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन के सहयोग से भैंसी नदी की करीब 55 से 56 किलोमीटर लंबाई में खुदाई कराई गई थी। शुरुआत में 35 से 36 किलोमीटर खुदाई का लक्ष्य था, लेकिन जनसहयोग से इसे बढ़ाकर पूरा किया गया। खास बात यह रही कि पूरा कार्य महज 15 से 20 दिनों में पूरा हो गया था। अब नदी की दूसरी धारा, जिसकी लंबाई लगभग 25 से 26 किलोमीटर है, की खुदाई शुरू कराई गई है। प्रशासन ने इसे अगले 10 से 15 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर दूसरे-तीसरे दिन मौके पर पहुंचकर कार्य की निगरानी करें और अभियान को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाएं। जिलाधिकारी ने वृक्षारोपण पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पेड़ों की जड़ें मिट्टी को मजबूत बनाती हैं और वर्षा जल को जमीन में रोकने में मदद करती हैं, जिससे भूजल स्तर बढ़ता है। पिछले वर्ष नदी किनारे बड़े पैमाने पर पौधारोपण कराया गया था। इस बार 40 से 50 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। पौधों की सुरक्षा के लिए तारबाड़ कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने में वर्षों लगे हैं, इसलिए सुधार में भी समय लगेगा। आने वाले चार से पांच वर्षों में भैंसी नदी में प्राकृतिक जल प्रवाह फिर विकसित होने की संभावना है। कार्यक्रम में एसडीएम, बीडीओ, लोकभारती संस्था के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

